चीन ने पहली बार जाल के जरिये रॉकेट को समुद्र में उतारा
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बीजिंग, एजेंसी।
चीन ने पुन: उपयोग योग्य (रीयूजेबल) रॉकेट तकनीक में बड़ी सफलता हासिल की। उसने पहली बार रॉकेट के पहले चरण के बूस्टर को समुद्र में सुरक्षित तरीके उतारने का सफल परीक्षण किया। इसके साथ ही चीन नेट (जाल) आधारित रिकवरी प्रणाली के जरिये रॉकेट बूस्टर को पकड़ने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन का प्रक्षेपण
चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन (सीएएससी) के अनुसार लॉन्ग मार्च-10ए कैरियर रॉकेट को शुक्रवार को हैनान कमर्शियल स्पेस लॉन्च साइट से सफलतापूर्वक प्रक्षिप्त किया गया। प्रक्षेपण के लगभग छह मिनट बाद रॉकेट का पहला और दूसरा चरण अलग हो गया। इसके बाद पहले चरण के बूस्टर को नियंत्रित तरीके समुद्र में स्थित विशेष रिकवरी प्लेटफॉर्म पर उतर गया, जहां उसे नेट आधारित रिकवरी प्रणाली से सुरक्षित पकड़ लिया गया। सीएएससी ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल के पहले चरण की नियंत्रित रिकवरी की गई है। साथ ही यह दुनिया की पहली ऐसी सफलता है, जिसमें रॉकेट के पहले चरण को नेट रिकवरी सिस्टम के जरिये सुरक्षित पकड़ा गया। पारंपरिक रॉकेटों के विपरीत, रीयूजेबल बूस्टर को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह प्रक्षेपण के बाद सुरक्षित लौट सके और मरम्मत के बाद दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। इससे अंतरिक्ष मिशनों की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। यह घटनाक्रम एलन मस्क की अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स के दिसंबर 2015 में कक्षीय श्रेणी के रॉकेट बूस्टर को सफलतापूर्वक उतारने वाली पहली कंपनी बनने के एक दशक से भी अधिक समय बाद हुआ है।
स्पेसएक्स की विधि
अब तक अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स अपने फाल्कन-9 रॉकेट के बूस्टर को समुद्र में मौजूद ड्रोन शिप पर वर्टिकल लैंडिंग कराती रही है। स्पेसएक्स ने दिसंबर, 2015 में पहली बार कक्षीय श्रेणी के रॉकेट बूस्टर की सफल रिकवरी कर पुन: उपयोग योग्य रॉकेट तकनीक की व्यवहारिकता साबित की थी। वहीं, चीन ने अलग तरीका अपनाते हुए बूस्टर को सीधे प्लेटफॉर्म पर उतारने के बजाय जाल से पकड़ने की तकनीक का सफल परीक्षण किया है।
चीन की पहले की कोशिशें
अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में चीन के दो अन्य पुन: इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेटों ने स्पेसएक्स की तर्ज पर 'ग्रिड फिन्स' और 'लैंडिंग लेग्स' की मदद से सीधे खड़े उतरने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों ही प्रयास असफल रहे थे।
रीयूजेबल तकनीक का महत्व
रीयूजेबल रॉकेट का मतलब है कि महंगे बूस्टर को हर बार नया बनाने की बजाय रिकवर करके दोबारा इस्तेमाल किया जाए। इससे लॉन्च की लागत बहुत कम हो जाती है। स्पेसएक्स ने फॉल्कन 9 रॉकेट से यह क्रांति शुरू की थी। अब चीन भी तेजी से इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
तकनीकी चुनौतियां और भविष्य
समुद्र में नेट से रिकवरी करना आसान नहीं है। रॉकेट को सटीक जगह पर लाना, हवा-समुद्र की स्थिति को नियंत्रित करना और नेट सिस्टम की मजबूती जरूरी है। चीन ने इसे सफलतापूर्वक कर दिखाया। यह परीक्षण चीन की अगली पीढ़ी के मानव स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लिए महत्वपूर्ण है। दुनिया में रीयूजेबल रॉकेट की रेस तेज हो गई है. अमेरिका, चीन और अन्य देश सस्ते स्पेस ट्रांसपोर्टेशन पर काम कर रहे हैं. चीन की यह सफलता दिखाती है कि वह इस क्षेत्र में पीछे नहीं है।
नेट आधारित रिकवरी प्रणाली क्या है
नेट आधारित रिकवरी प्रणाली वह तकनीक है, जिसमें अंतरिक्ष से लौट रहे रॉकेट के बूस्टर को सीधे जमीन या प्लेटफॉर्म पर उतारने के बजाय एक विशेष मजबूत जाल (नेट) की मदद से सुरक्षित पकड़ लिया जाता है।
- रॉकेट का पहला चरण (बूस्टर) अपना काम पूरा करने के बाद नियंत्रित तरीके से वापस लौटता है।
- समुद्र में तैनात एक विशेष रिकवरी प्लेटफॉर्म पर बड़ा और मजबूत जाल (नेट) लगाया जाता है।
- बूस्टर उसी जाल में फंसकर सुरक्षित रुक जाता है, जिससे उसे नुकसान कम होता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।


