Child Cast Decide By Father Name Not Mother Delhi High Court Decision - बच्चे की जाति मां से तय होगी या फिर पिता से? दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला DA Image

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बच्चे की जाति मां से तय होगी या फिर पिता से? दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला

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बच्चे की जाति वही मानी जाएगी जो उसके पिता की है। उच्च न्यायालय ने फैसला देते हुए मां की जाति के आधार पर बच्चे का जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है। पति से तलाक के बाद वायु सेना की वरिष्ठ महिला अधिकारी ने अपने दोनों बेटे के लिए अपनी जाति (अनुसूचित जाति) के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश देने की मांग की थी।

जस्टिस विभू बाखरू ने कहा है कि याचिकाकर्ता के दोनों बेटों ने अपने नाम में पिता के सरनेम (जाति का ही उल्लेख किया) लगाया है, इससे साफ है कि वे खुद को सामान्य जाति का मानते रहे हैं। हाल ही में पारित फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा कि पिता की जाति के आधार पर बच्चों का जाति प्रमाण पत्र जारी करना कोई अपवाद नहीं है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह जरूर कहा है कि विशेष परिस्थिति में बच्चे को अपनी मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी हो सकता है, जब स्थापित हो जाए कि इसकी वजह से उसके साथ भेदभाव हुआ।

जाति की वजह से भेदभाव की बात साबित नहीं : न्यायालय ने कहा है कि जहां तक इस मामले का सवाल है तो याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रही है कि उनकी जाति की वजह से उनके बच्चे के साथ किसी तरह का भेदभाव या सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। महिला की ओर से दलील दी गई थी कि बच्चे उनके साथ बचपन से रह रहे हैं और उनकी जाति की वजह से काफी भेदभाव हुआ है। इसलिए सरकार को आदेश दिया जाए कि उनके बेटों का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी करे।

नामी स्कूल में बच्चे : उच्च न्यायालय ने कहा है कि याचिकाकर्ता महिला वायु सेना में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर तैनात हैं और उनके दोनों बेटे दिल्ली के एक नामी स्कूल में वर्ष 2016 तक पढ़ाई की है। न्यायालय ने कहा है कि वायु सेना में अधिकारियों का जीवन काफी नियमित होता है और वे संरक्षित क्षेत्र (छावनी परिषद) में रहते हैं। ऐसे वातावरण में बच्चों के साथ किसी तरह के भेदभाव की संभावना नहीं है। दोनों की पढ़ाई काफी प्रतिष्ठित स्कूल में हुई है, इसलिए यह कहना गलत होगा कि उनके साथ वहां पर किसी तरह का भेदभाव हुआ होगा।

असम की रहने वाली महिला की मांग खारिज
वायु सेना में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर तैनात मूल रूप से असम की रहने वाली महिला की शादी 1999 में सवर्ण जाति के युवक से हुआ था। शादी के बाद उन्हें दो बेटे हुए। उनकी उम्र क्रमश: 17 व 15 वर्ष है। किसी कारणवश दोनों में विवाद रहने लगा और याचिकाकर्ता ने 2005 में पति से तलाक के अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्हें 2009 में तलाक मिल गया। महिला ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दिल्ली सरकार और अन्य विभागों को अपनी जाति के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश देने की मांग की थी।  महिला ने बताया कि वह मूल रूप से असम की है। वह जिस जाति से संबंध रखती है वह वहां पर अनुसूचित जाति है, लिहाजा दोनों बच्चों को अनुसूचित जाति क प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

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