Chhattisgarh 500 people attend last rites of beloved 130-years-old crocodile in this village मगरमच्छ की अंतिम विदाई में रोया पूरा गांव, खाता था दाल-चावल, नाम था गंगाराम-VIDEO, India News in Hindi - Hindustan
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मगरमच्छ की अंतिम विदाई में रोया पूरा गांव, खाता था दाल-चावल, नाम था गंगाराम-VIDEO

छत्तीसगढ़ के एक गांव में एक मगरमच्छ की मौत से मातम पसरा है। बेमेतरा के बवामोहतरा गांव में मंगलवार को करीब 500 लोगों ने अपने प्यारे मगरमच्छ गंगाराम को अंतिम विदाई थी। वन विभाग के मुताबिक इस मगरमच्छ की...

रितेश मिश्रा, एचटी, रायपुर Thu, 10 Jan 2019 03:46 PM
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मगरमच्छ की अंतिम विदाई में रोया पूरा गांव, खाता था दाल-चावल, नाम था गंगाराम-VIDEO

छत्तीसगढ़ के एक गांव में एक मगरमच्छ की मौत से मातम पसरा है। बेमेतरा के बवामोहतरा गांव में मंगलवार को करीब 500 लोगों ने अपने प्यारे मगरमच्छ गंगाराम को अंतिम विदाई थी। वन विभाग के मुताबिक इस मगरमच्छ की उम्र करीब 130 साल थी। तीन मीटर से ज्यादा लंबे इस मगरमच्छ को बवामोहतरा गांव में ही दफनाया गया। 

मंगलवार की सुबह कुछ ग्रामीण नाहने के लिए जब तालाब पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गंगाराम पानी में कुछ हरकत नहीं कर रहा है। काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला गया। 
वन विभाग की टीम ने वहां पहुंचकर उसकी मौत की पुष्टि की। खबर सुनकर गांव के लोग वहां पहूंचे और फूट-फूट कर रोए। 

सब डिविजनल ऑफिसर  (वन विभाग) आरके सिन्हा ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि गांव वालों की मौजूदगी में ही मगरमच्छ का पोस्टमार्टम किया गया।  पोस्टमार्टम के बाद उसका शव उन्हें सौंप दिया गया। मगरमच्छ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। 

गांववालों ने मगरमच्छ को पूरे सम्मान के साथ फूलों से सजे ट्रैक्टर में अंतिम विदाई दी। करीब 500 लोग उसकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। 

गांव में रहने वाले बसावन नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि गंगाराम एक मगरमच्छ नहीं एक दोस्त की तरह था। तालाब में उसके आगे-पीछे बच्चे तैरते रहते थे लेकिन उसने कभी भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया। गांव के लोग उसे देवता की तरह मानते थे और उसकी पूजा करते थे।' 

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'गांव के लोग गंगाराम को दाल और चावल खिलाया करते थे। वह बहुत समझदार भी था। वह जब किसी को तालाब में तैरते देखता था, तो खुद ही तालाब में दूसरी तरफ चला जाता था।'

गांव के सरपंच मोहन साहू ने कहा कि इस गांव को मगरमच्छा वाला गांव कहा जाएगा। 

सिन्हा ने कहा, 'गांववाले भावनात्मक तौर पर मगरमच्छ से काफी जुड़े हुए थे। इसलिए हमने उसका शव गांववालों को दे दिया, उन्होंने उसका शव तालाब के पास दफनाया है। वह तालाब के पास ही उसकी मूर्ति भी बनाना चाहते हैं।'

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