भागलपुर में बाढ़ का पानी क्यों फंस रहा, होगा अध्ययन
हिन्दुस्तान विशेष नदी के बदलते ट्रेंड को देख डब्ल्यूआरडी के अभियंता चकित सुल्तानगंज और कहलगांव

भागलपुर, मुख्य संवाददाता-संजय कुमार। भागलपुर में गंगा नदी के बदलते और अप्रत्याशित व्यवहार ने जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के अधिकारियों और अभियंताओं को हैरत में डाल दिया है। अभी जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। भागलपुर में सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा में पानी लबालब है। जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा है और घट रहा है, उसमें तारतम्य नहीं है। जब सुल्तानगंज में पानी घट रहा है, तब डाउनस्ट्रीम में भागलपुर में भी घटना चाहिए और इसके डाउनस्ट्रीम में कहलगांव में घटना चाहिए। लेकिन सुल्तानगंज और कहलगांव में पानी उतर रहा है, जबकि भागलपुर में स्थिर है。
गंगा का स्थिरता विश्लेषण
भागलपुर में गंगा का यह ट्रेंड अभियंताओं के लिए पहेली बन गई है। विभाग ने आरंभिक जांच में अनुमान लगाया है कि भागलपुर में उम्मीद से अधिक गाद जमी है। इस कारण पानी का फ्लो दूसरी तरफ शिफ्ट हो रहा है। इन्हीं कारणों से उत्तरी क्षेत्र यानी नारायणपुर के जीएन तटबंध, राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध, इस्माईलपुर बिंदटोली तटबंध आदि पर दबाव बन रहा है। विभाग ने निर्णय लिया है कि जलस्तर कम होने के बाद इस परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा, ताकि अगले सीजन में बाढ़-कटाव से जिले के लोगों को राहत मिल सके।
अभियंताओं का समर्पण
विभाग के अभियंता मुख्य वरुण कुमार पिछले दिनों भागलपुर में थे। भागलपुर में बाढ़ का पानी लंबे समय तक स्थिर रहने और निकास न होने की मुख्य वजहों का उन्होंने खुलासा किया। सीएम के साथ आए वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था कि प्रारंभिक जांच में भागलपुर के समीप नदी के तल में अत्यधिक गाद का जमा होना इस समस्या का सबसे बड़ा कारण पाया गया है। भागलपुर में कैंप कर रहे मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान बताते हैं, भागलपुर के पास गंगा नदी के पेट (तलहटी) में सिल्ट यानी गाद की एक मोटी परत जमा हो गई है। सालों से जमा हो रही इस गाद के कारण नदी की गहराई काफी कम हो गई है। जब गहराई ही नहीं बची, तो नदी की पानी सोखने और उसे आगे प्रवाहित करने की क्षमता बेहद कमजोर हो गई है। यही वजह है कि लाखों क्यूसेक पानी शहर और उसके आसपास के निचले इलाकों में फंसकर रह गया है।
जल संसाधन विभाग का कदम
मुख्य अभियंता ने बताया कि जल संसाधन विभाग अब इस पूरे रूट और नदी के बदलते ट्रेंड का वैज्ञानिक अध्ययन (हाइड्रोलॉजिकल टस्टी) कराएगा। इसके लिए विभाग के विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम तैनात की जा रही है, जो गाद के पैटर्न और नदी की धारा में आए बदलावों की बारीकी से जांच करेगी। इस अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य में गाद हटाने (ड्रेजिंग) और बाढ़ सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक और स्थायी मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।


