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Chandrayaan-3 को लेकर आई खुशखबरी, जागेंगे विक्रम और प्रज्ञान? ये खास तकनीक करेगी मदद

चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी वीरमुथुवेल ने कहा कि रोवर्स और लैंडर को मेंटेन करने के लिए प्रोपल्शन मॉड्यूल के परमाणु संसाधनों का उपयोग भविष्य में किया जा सकता है।

 Chandrayaan-3 को लेकर आई खुशखबरी, जागेंगे विक्रम और प्रज्ञान? ये खास तकनीक करेगी मदद
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 01 Nov 2023 09:53 PM
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Chandrayaan-3: इसरो के चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड कर इतिहास रच दिया है। इस मिशन को लेकर हर दिन अलग अलग जानकारियां सामने आ रही हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि अब चंद्रयान-3 मिशन का प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा की कक्षा में परमाणु प्रौद्योगिकी (न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी) के जरिए ऊर्जा हासिल कर रहा है। टीओआई की रिपोर्ट की मानें तो इसकी पुष्टि परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने की है। मोहंती ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भारत का परमाणु क्षेत्र इतने महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा हो सकता है। 

प्रोपल्शन मॉड्यूल के बारे जानकारी देते हुए इसरो के अधिकारियों ने कहा कि प्रोपल्शन मॉड्यूल दो रेडियो आइसोटोप हीटिंग इकाइयों (आरएचयू) से लैस है, जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) द्वारा डिजाइन और डेवलप किया गया है। यह एक वाट की एनर्जी उत्पन्न करता है। आरएचयू की मदद से अंतरिक्ष यान को उसके लिए जरूरी तापमान मेंटेन करने में मदद मिलती है।

क्या जागेंगे व्रिकम और प्रज्ञान

चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी वीरमुथुवेल ने कहा कि इसरो रोवर और लैंडर को मेंटेन करने के लिए प्रोपल्शन मॉड्यूल के परमाणु संसाधनों का उपयोग भविष्य में कर सकता है। यानी ऐसा हो सकता है कि इसका इस्तेमाल भविष्य में लैंडर और रोवर के जरिए सिग्नल पाने के लिए किया जाए। हालांकि, डायरेक्ट ऊर्जा देने के लिए चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर आरएचयू को स्थापित नहीं किया गया। इसरो की मानें तो ऐसा करने से चंद्रयान-3 का द्रव्यमान बढ़ जाता, जिसके चलते मिशन में किसी तरह की परेशानी आ सकती थी।

लैंडिंग के वक्त उड़ाई 2 टन धूल

उल्लेखनीय है कि 23 अगस्त 2023 को भारत के चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुप पर सॉफ्ट लैंडिंग करके इतिहास रच दिया था। लेकिन उस दिन लैंडर के लैंड करते ही दक्षिणी ध्रुप पर एक घटना और हुई थी। विक्रम लैंडर के लैंड करते ही चंद्रमा की सतह पर इतनी लूनर मिट्टी उड़ी कि उसने चांद पर ही एक इजेक्ट हेलो तैयार कर दिया। इसरो ने बीते शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी। इसरो ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, "चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को चांद पर लैंडिंग करते ही चांद की सतह पर एक इजेक्ट हेलो बना दिया। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि विक्रम लैंडर के लैंड करते ही लगभग 2.06 टन लूनर मिट्टी चांद पर फैल गई।"