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chandrayaan 2: महिला वैज्ञानिकों के हाथों में देश के अंतरिक्ष मिशन की कमान

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इसरो के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अंतरिक्ष मिशन की कमान दो महिला वैज्ञानिकों के हाथों में है। इसमें वनिता मुथैया चंद्रयान-2 मिशन में परियोजना निदेशक हैं और रितु करिधाल मिशन डायरेक्टर हैं। कुछ और महिला वैज्ञानिक भी हैं जिन्होंने इस मिशन के जरिए सफलता का आसमान छुआ है। चंद्रयान-2 को संभव बनाने में करीब 30 प्रतिशत महिलाओं का हाथ है। 

वनिता मुथैया: परियोजना निदेशक
चंद्रयान मिशन की परियोजना निदेशक हैं। डिजिटल सिग्नल प्रोर्सेंसग में माहिर वनिता ने उपग्रह संचार पर कई पेपर लिखे हैं। उन्होंने र्मैंपग के लिए इस्तेमाल होने वाले पहले भारतीय रिमोट र्सेंंसग उपग्रह (कार्टोसैट-1), दूसरे महासागर अनुप्रयोग उपग्रह (ओसियनसैट-2) और तीसरे उष्णकटिबंधीय में जल चक्र और ऊर्जा विनिमय का अध्ययन करने के लिए इंडो-फ्रेंच उपग्रह (मेघा-ट्रॉपिक) पर उप परियोजना निदेशक के तौर पर काम किया है। 

रितु करिधाल: मिशन डायरेक्टर
रितु करिधाल चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर हैं। वह मंगलयान में डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर रही थीं। लखनऊ के एक मध्यवर्गीय परिवार से आने वाली रितु ने एयरोस्पेस इंजीनिर्यंरग में मास्टर्स डिग्री लेने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस पहुंची। वह 1997 से इसरो में काम कर रही हैं। उन्हें 2007 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से युवा वैज्ञानिक का अवॉर्ड मिला था। चंद्रयान-2 के चंद्रमा की परिक्रमा कक्षा में दाखिल होने से जुड़े मिशन पर वह फोकस करेंगी। 

टीके अनुराधा 
अनुराधा इसरो की महिला वैज्ञानिकों में सबसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने 1982 में एजेंसी ज्वाइन की थी। वह पहली महिला उपग्रह परियोजना निदेशक हैं। अनुराधा अभी यूआर राव अंतरिक्ष केंद्र में जियोसैट प्रोग्राम डायरेक्टर हैं। वह जियो सैटेलाइट की लर्ॉंन्चग से जुड़े कार्यों की देखरेख करती हैं। उनकी उम्र लगभग 9 साल रही होगी, जब उन्होंने यह जाना कि चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग थे। बस यही था एक अंतरिक्ष यात्री बनने का उनका पहला पाठ जिससे वे सम्मोहित हुईं।

एन वालारमति 
टीके अनुराधा देश की पहली राडार इर्मेंजग सैटलाइट रिसैट-1 की परियोजना निदेशक के तौर पर अब्दुल कलाम अवॉर्ड पाने वाली पहली शख्स  हैं। वह रिमोट र्सेंंसग सैटेलाइट में प्रयुक्त मिशन की प्रमुख हैं। 

वीआर ललितांबिका 
गगनयान मिशन की को-ऑर्डिनेशन प्रमुख हैं। चंद्रयान’2 मिशन के लिए अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। ललितांबिका एडवांस्ड लॉन्चर तकनीक की विशेषज्ञ हैं। 

सीता सोमसुंदरम 
यह इसरो के स्पेस साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन की अग्रिम पंक्ति की विशेषज्ञ हैं। सोमसुंदरम ने मंगलयान मिशन में भी बड़ा योगदान दिया। वह अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय में कार्यक्रम निदेशक हैं। 

नंदिनी हरिनाथ 
यह मार्स ऑर्बिटर मिशन की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर हैं। वह देश की पहली राडार इर्मेंजग सैटलाइट रिसैट- 1 की ऑपरेशन डायरेक्टर की भूमिका निभा चुकी हैं। 

मीनल रोहित 
मीनल मार्स मिशन की परियोजना प्रबंधक हैं। वह इसरो की सिस्टम्स इंजीनियर के तौर पर मार्स मिशन के लिए मिथेन सेंसर बनाने में योगदान दे चुकी हैं।

मौमिता दत्ता 
मिशन की परियोजना प्रबंधक हैं। मार्स पेलोड बनाने में योगदान दिया है। अभी वह मेक इन इंडिया के तहत ऑप्टिकल साइंस में काम कर रही एक टीम की हेड हैं।

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  • Web Title:chandrayaan 2 The command of the countrys space mission in the hands of women scientists