Chandrayaan-2 NASA will try to established Contact with Vikram lander on 21th september - चंद्रयान-2: विक्रम लैंडर की तस्वीर कैद करने में नासा का पहला प्रयास विफल, शनिवार को हो सकता है करिश्मा? DA Image

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चंद्रयान-2: विक्रम लैंडर की तस्वीर कैद करने में नासा का पहला प्रयास विफल, शनिवार को हो सकता है करिश्मा?

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चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से फिर संपर्क स्थापित करने का समय नजदीक आने के साथ, नासा के मून ऑर्बिटर ने चांद के उस हिस्से की तस्वीरें खींची हैं, जहां भारत ने अभियान के तहत सॉफ्ट लैंडिंग कराने का प्रयास किया था। मगर उस तस्वीर में लैंडर का पता नहीं चल पाया। लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर कैमरा (LROC) ने लक्षित लैंडिंग साइट के आसपास की छवियों को कैद किया, मगर लैंडर का सही स्थान का पता नहीं चल पाया, क्योंकि हो सकता है लैंडर कैमरे के क्षेत्र से बाहर हो। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बृहस्पतिवार को इसकी पुष्टि की है। नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान वहां की कई तस्वीरें ली, जहां विक्रम ने उतरने का प्रयास किया था। मगर शनिवार का दिन काफी अहम होने वाला है, क्योंकि नासा एक बार फिर से 21 सितंबर को विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश होगी। 

एलआरओ मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट जॉन कैलर ने एक बयान में कहा कि इसने विक्रम के उतरने वाले स्थान के ऊपर से उड़ान भरी। लैंडर से 21 सितंबर को संपर्क साधने का फिर प्रयास किया जाएगा। बता दें कि अब तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ऑर्बिटर को भारत के मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम' की तस्वीरें खींचने में सफलता नहीं मिल पाई। चंद्रमा पर रात होने की शुरुआत हो चुकी है और वहां अंधेरा छाने लगा है। नासा अब ऑर्बिटर के कैमरे में कैद तस्वीरों का विश्लेषण कर रहा है।

सीनेट डॉट कॉम ने एक बयान में कैली के हवाले से कहा, “एलआरओसी टीम इन नयी तस्वीरों का विश्लेषण करेगी और पूर्व की तस्वीरों से उनकी तुलना कर यह देखेगी कि क्या लैंडर नजर आ रहा है (यह छाया में या तस्वीर में कैद इलाके के बाहर हो सकता है)।”रिपोर्ट में कहा गया है कि नासा इन छवियों का विश्लेषण, प्रमाणीकरण और समीक्षा कर रहा है। उस वक्त चंद्रमा पर शाम का समय था जब ऑर्बिटर वहां से गुजरा था जिसका मतलब है कि इलाके का ज्यादातर हिस्सा बिंब में कैद हुआ होगा। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-2 के विक्रम मॉड्यूल का सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का प्रयास तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था। लैंडर का आखिरी क्षण में जमीनी केंद्रों से संपर्क टूट गया था। नासा के एक प्रवक्ता ने इससे पहले कहा था कि इसरो के विश्लेषण को साबित करने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर के लक्षित इलाके की पहले और बाद में ली गई तस्वीरों को साझा करेगी। 
 

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