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chandrayaan 2: जानें चंद्रमा पर दुनिया के प्रमुख अभियानों के बारे में

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Gunateet
Tue, 23 Jul 2019 05:33 AM
chandrayaan 2: जानें चंद्रमा पर दुनिया के प्रमुख अभियानों के बारे में

चांद पर जाने की पहली कोशिश 1958 में शुरू हुई। अमेरिका ने पायनियर तो सोवियत रुस ने ई1 मिशन भेजा। हालांकि, दोनों ही मिशन असफल रहे। पर कोशिश जारी रही। 1958 में ही अमेरिका का पायनियर-1 भी प्रक्षेपण असफल रहा। 

पहली सफलता : सोवियत रुस का लूना -2 : 1959  
सितंबर 1959 में रूस के लूना 2 मिशन को चांद तक पहुंचने में पहली बार सफलता मिली। यह पहला एयरक्राफ्ट था जो चांद की सतह तक पहुंच पाया। 

चंद्रमा की तस्वीरें लेकर लौटा नासा  का रेंजर 7  
जुलाई 1964 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा भेजे गए रेंजर -7 को चांद पर उतरने में सफलता मिली। यह चंद्रमा सतह की छवियां लेकर पृथ्वी पर पहुंचा।

1965 में रेंजर 8 ने अपोलो के लिए जमीन तैयार की

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने रेंजर 7 की सफलता के बाद 1965 में 20 फरवरी को रेंजर 8 को चांद के मिशन पर भेजा। यह रोबोटिक अंतरिक्ष यान श्रंखला थी, जिसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह की क्लोज-अप तस्वीरें प्राप्त करना था। चित्रों ने अपोलो मिशनों के लिए उतरने लायक स्थलों का चयन करने में मदद की। 

इंसान का चांद पर पहला कदम 

मिशन अपोलो-11 को 16 जुलाई 1969 को कैनेडी स्पेस सेंटर लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39-ए से सुबह 8:32 पर लॉन्च किया गया था। नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने 20 जुलाई को चांद पर कदम रखा था। इसे देखने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सुबह 4.30 बजे तक जागती रही थीं। 

2008 में भारत का चंद्रयान 1 भी सफल

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी पीएसएलवी - एक्सएल से 22 अक्तूबर 2008 में भेजा गया चंद्रयान-1 मिशन सफल रहा। इसने चंद्रमा पर पानी होने की पुष्टि की। चंद्रयान-1 आंकड़े ने चंद्रमा के बहिर्मंडल में चंद्रमा की सतह पर और उप-सतह (दस मीटर से भी गहराई) में जल होने का साक्ष्य प्रस्तुत किया। 

3 जनवरी 2019 को  चीन का चांग ई-4  

चीन ने चांग ई-4 नाम के चंद्रमा मिशन पर बड़ी कामयाबी पाई। 3 जनवरी 2019 को चंद्रमा के दूर के इलाके में चीनी अंतरिक्ष यान से एक लैंडर और एक रोवर ( यू-तू ) ने सॉफ्ट र्लैंंडग की। इस मिशन में लैंडर के साथ एक जैविक प्रयोग को संचालित करने के लिए एक कनस्तर भी चांद पर भेजा गया है।

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