जनगणना 2027: बर्फीले इलाकों में मोबाइल बना चुनौती
जम्मू-कश्मीर में पहली डिजिटल जनगणना की तैयारी में कई तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां आ रही हैं। डोडा जिले में मोबाइल फोन की क्षमता और इंटरनेट को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। खराब मौसम और दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचना भी कठिन होगा। जनगणना 2027 में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर होगी।

देश की पहली डिजिटल जनगणना को लेकर जम्मू-कश्मीर के बर्फीले और दुर्गम इलाकों में तैयारियों के बीच कई व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हम सभी चुनौतियों को चिह्नित कर रहे हैं जिससे अन्य स्थानों पर इस तरह की दिक्कतें न हों। सूत्रों के अनुसार, डोडा जिले में हुई समीक्षा बैठक के दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के पास उपलब्ध मोबाइल फोन की क्षमता और इंटरनेट की चुनौतियों को चिन्हित किया गया है। सूत्रों ने कहा, आगामी जनसंख्या गणना के लिए मोबाइल फोन में कम से कम 8 जीबी रैम और एंड्रॉयड 13 या उससे ऊपर की क्षमता नहीं होने पर सभी आंकड़ों को फोन के माध्यम से दर्ज कर पाना मुश्किल होगा। सूत्रों के अनुसार कुछ प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के पास इससे कम क्षमता वाले मोबाइल फोन हैं। इससे जनगणना के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल अनुप्रयोग को चलाने, आंकड़े दर्ज करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से भेजने में परेशानी आने की आशंका है। जनगणना 2027 में बड़ी संख्या में प्रगणक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। इनमें मुख्य रूप से शिक्षक और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं。
बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में चुनौती ज्यादा
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में जनगणना कर्मियों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच घर-घर पहुंचना होगा। कई गांव दूरदराज के क्षेत्रों में हैं। खराब मौसम के दौरान वहां पहुंचना मुश्किल हो सकता है। अधिकारियों ने कहा, मोबाइल फोन की कम क्षमता समस्या को और बढ़ा सकती है। यदि उपकरण में पर्याप्त क्षमता नहीं हुई तो आंकड़े दर्ज करने में देरी, अनुप्रयोग के धीमे चलने या तकनीकी बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की भी चिंता
दुर्गम पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क तथा इंटरनेट की उपलब्धता हर जगह समान नहीं है। डिजिटल जनगणना में नेटवर्क संबंधी समस्या होने पर आंकड़े दर्ज करने और उन्हें आगे भेजने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक फील्ड में रहने वाले कर्मचारियों के सामने मोबाइल की बैटरी, चार्जिंग की सुविधा और खराब मौसम में उपकरणों को सुरक्षित रखने जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी आ सकती हैं।
एक सितंबर से शुरू होगी घर-घर गणना
जनसंख्या गणना का यह चरण जम्मू-कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों के साथ-साथ लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ बर्फीले इलाकों में भी देश के अन्य हिस्सों से पहले कराया जा रहा है। इन क्षेत्रों में लोगों के लिए स्वयं जनगणना की सुविधा 17 से 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध है। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना करेंगे। देश के बाकी हिस्सों में घर-घर जनगणना का यह चरण फरवरी 2027 में कराया जाना है।


