श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में सीईओ का चयन मुश्किल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के चयन पर चर्चा मुश्किल है। वजह यह है कि सीईओ के लिए दो हजार से अधिक आवेदन आए हैं, जिनकी स्क्रीनिंग चार दिन में नहीं हो पाएगी। चयन समिति को अतिरिक्त समय मिल सकता है।

-करीब दो हजार आवेदनों की स्क्रीनिंग में लगेगा वक्त, बुधवार को प्रस्तावित बैठक में नाम आना मुश्किल -चयन के लिए गठित समिति को दिया जा सकता है अतिरिक्त समय, एसआईटी रिपोर्ट भी नहीं मिल पाएगी
लखनऊ। विशेष संवाददाता
सीईओ चयन में कठिनाइयाँ
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को प्रस्तावित बैठक में ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के चयन पर चर्चा हो पाना मुश्किल है। वजह बताई जा रही है कि सीईओ के लिए इतने आवेदन आ गए हैं कि उनकी स्क्रीनिंग चार दिन में संभव नहीं है। इस नाते चयन समिति सीईओ के लिए तीन नाम बुधवार तक प्रस्तावित नहीं कर सकती। जब सीईओ के लिए नाम नहीं आएंगे तो ट्रस्ट की बैठक में चर्चा भी संभव नहीं होगी।
मंदिर प्रबंधन की बैठक
चढ़ावा चोरी के बाद 6 जुलाई को आयोजित तीर्थ क्षेत्र की बैठक में मंदिर प्रबंधन पर चर्चा हुई। इसी बैठक में तय किया गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए पेशेवर अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही मंदिर की व्यवस्था के लिए एक इकोसिस्टम तैयार किया जा सके। यहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने का फैसला लिया गया था। इसके चयन के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी गठित की गई।
आवेदन की संख्या
इस कमेटी ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी के लिए देशभर से आवेदन मांगे। पता चला है कि 18 जुलाई शाम 4 बजे तक सीईओ पद के लिए कई सेवानिवृत्त नौकरशाह, कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों समेत दो हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किए हैं। इतने अधिक आवेदन आ गए कि चयन समिति को हर आवेदन की स्क्रीनिंग तय योग्यता के आधार पर करना मुश्किल हो रहा है। समिति ने सीईओ के लिए तीन नाम प्रस्तावित करने के लिए वक्त मांगा है। इस नाते माना जा रहा है कि बुधवार की बैठक में इस पर चर्चा नहीं हो पाएगी।
एसआईटी रिपोर्ट पर चर्चा
तीर्थ क्षेत्र के एजेंडे में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर भी चर्चा प्रस्तावित है। हालांकि यह भी लिखा गया है कि यदि अंतिम रिपोर्ट आ जाती है, तभी चर्चा संभव हो पाएगी। ताजा घटनाक्रम के मुताबिक एसआईटी ने भी अंतिम रिपोर्ट के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मांग लिया है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाने के नाते इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को अब न सौंपे। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि ट्रस्ट के अनुरोध पर ही एसआईटी का गठन किया गया था। इस नाते ही प्रारंभिक रिपोर्ट शासन के साथ ट्रस्ट को सौंपी गई थी। अंतिम रिपोर्ट भी ट्रस्ट को सौंपना चाहिए। फिलहाल इस मुद्दे पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में तस्वीर साफ हो सकती है। बुधवार की बैठक में एजेंडे के अन्य प्रस्तावों पर चर्चा होनी है.


