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हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिवः सरकार एससी-एसटी एक्ट पर जल्दबाजी में नहीं, पहले कानूनी विकल्पों का करेगी इस्तेमाल

इस फैसले के खिलाफ सरकार की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर सुनवाई जारी है। इसकी अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम को कथित रूप से हल्का करने के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए सरकार जल्द अध्यादेश नहीं लाएगी, बल्कि पहले कोर्ट के कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
 
इस फैसले के खिलाफ सरकार की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर सुनवाई जारी है। इसकी अगली सुनवाई जुलाई में होगी। सरकार के सूत्रों के अनुसार इस मामले में पुनर्विचार याचिका पर फैसला आने के बाद उपचारात्मक याचिका का विकल्प अपनाया जाएगा। सामान्यतया पुनर्विचार याचिकाएं 99 फीसदी केसों में विफल हो जाती हैं। क्योंकि इसकी सुनवाई वही बेंच करती है जिसने इस पर फैसला दिया है। इस मामले में कोर्ट का जो रुख है वह बिल्कुल साफ है। 

कोर्ट ने कहा कि उसका फैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि सिर्फ आरोप भर लगाने पर किसी व्यक्ति को जेल में नहीं डाला जा सकता और न ही उसे अग्रिम जमानत लेने से वंचित किया जा सकता है। यह उसे संविधान के अनुच्छेद -21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत आजादी के अधिकार हैं, जिन्हें किसी कानून के जरिये कमतर नहीं किया जा सकता। 

उपचारात्मक याचिका दायर की जाएगी
सूत्रों ने कहा कि पुनर्विचार याचिका के विफल होने पर उपचारात्मक याचिका दायर की जाएगी। यह याचिका पांच जजों की पीठ सुनेगी जिसमें फैसला देने वाली पीठ के जज भी होंगे। हालांकि फैसला देने वाले एक जज जस्टिस एके गोयल 6 जुलाई को रिटायर हो जाएंगे। 

मानसून सत्र में विधेयक 
सूत्रों के मुताबिक अध्यादेश आखिरी विकल्प है जिसका प्रयोग इन उपायों के बाद ही किया जाएगा। इतना ही नहीं सरकार मानूसन सत्र में संशोधन विधेयक भी ला सकती है। संसद में इसका कोई राजनैतिक विरोध भी नहीं होगा। 

दो अप्रैल को दायर हुई थी पुनर्विचार याचिका 
केंद्र ने अजा-जजा (अत्याचार निरोधक) कानून, 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दो अप्रैल को याचिका दायर की थी। इस फैसले के बाद देशभर में दलित संगठनों ने प्रदर्शन किए थे जिसमें हुई हिंसा में नौ लोगों की मौत भी हो गई थी। 


 एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था 
20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी। ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाने की बात कही। 
07 दिन में जांच किए जाने के बाद ही जरूरी हो तो गिरफ्तारी की बात कही थी शीर्ष अदालत ने। 
 02 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ देश भर में अजा-अजजा संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया। 
11 लोग मारे गए देश के अलग अलग हिस्सों में बंद के दौरान हुई हिंसा में । 
02 अप्रैल को ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की। 

एससी एसटी एक्ट - 
2015 में एनडीए सरकार ने एससी एसटी एक्ट-1989 में संशोधन करके इसके प्रावधानों को कड़ा किया था। इसमें 60 दिन में चार्जशीट सौंपने को अनिवार्य किया गया था। 
194 जिलों में एससी एसटी एक्ट के मामलों की सुनवाई के लिए अलग अदालतों का प्रावधान है। 
47,388 केस दर्ज किए गए देश भर में एससी एसटी एक्ट के तहत 2016 में। 
25.8 फीसदी मुकदमों में लोगों को सजा हुई 2016 में दर्ज मामलों में। 


 

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  • Web Title:central government is not in a hurry to ordinance on SC ST act