जनगणना 2027 में पहली बार दर्ज होगी जाति, केंद्र सरकार ने 40 सवालों को दी मंजूरी
जनगणना 2027 में पहली बार दर्ज होगी जाति, केंद्र सरकार ने 40 सवालों को दी मंजूरीनई दिल्ली। विशेष संवाददाताकेंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन एन्युमेरेशन )...

जनगणना 2027 में पहली बार दर्ज होगी जाति, केंद्र सरकार ने 40 सवालों को दी मंजूरी नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
जाति की गणना में बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन एन्युमेरेशन ) के लिए 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्वतंत्र भारत में पहली बार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अलावा सभी जातियों की भी गणना की जाएगी।
प्री-टेस्ट का महत्व
जनगणना अनुसूची में प्रश्न संख्या 10 में अब लिखा होगा—“अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी)/जाति”। अधिकारियों के अनुसार जाति के लिए कोई पूर्व निर्धारित सूची या विकल्प नहीं होगा। यह खुला कॉलम होगा और गणनाकर्मी व्यक्ति द्वारा बताई गई जाति को उसी रूप में दर्ज करेंगे।
प्री-टेस्ट संपन्न
जुलाई में हो चुका है प्री-टेस्ट
जनसंख्या गणना के दूसरे चरण के पूर्व 1 से 20 जुलाई 2026 के बीच 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका प्री-टेस्ट किया गया था। इसमें एससी और एसटी के अलावा अन्य लोगों से उनकी जाति पूछकर उसे खुले कॉलम में दर्ज किया गया। माना जा रहा है कि अंतिम जनगणना में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
व्यापक जानकारी का संकलन
40 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी व्यापक जानकारी
भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना अधिकारियों द्वारा पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया है। इनमें परिवार और व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, प्रवास तथा पहचान से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं।
पहचान से संबंधित जानकारी में आधार नंबर, मोबाइल नंबर, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण और बैंक खातों की संख्या की जानकारी भी मांगी जाएगी, जहां लागू हो।
जनसंख्या गणना की प्रक्रिया
17 अगस्त से कुछ क्षेत्रों में शुरू होगा दूसरा चरण
जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त 2026 से लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा। देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना का यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा।
गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जारी अधिसूचना के बाद जनगणना अधिकारी अपने निर्धारित क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति से हाउसहोल्ड शेड्यूल के माध्यम से जानकारी जुटा सकेंगे।
40 सवालों की सूची
जनगणना 2027 में पूछे जाएंगे ये 40 सवाल
व्यक्ति का नाम
परिवार के मुखिया से संबंध
लिंग
जन्म तिथि और पूरी हो चुकी आयु
वर्तमान वैवाहिक स्थिति
विवाह के समय आयु
पति/पत्नी का नाम
घोषित राष्ट्रीयता
धर्म
अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी)/जाति
पिता से संबंधित जानकारी
माता से संबंधित जानकारी
दिव्यांगता
मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
साक्षरता एवं डिजिटल साक्षरता की स्थिति
शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति
उच्चतम शैक्षणिक योग्यता एवं विषय/विषय-क्षेत्र
पिछले वर्ष किसी समय काम किया या नहीं
आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
व्यवसाय
उद्योग, व्यापार या सेवा का प्रकार
कामगार की श्रेणी
गैर-आर्थिक गतिविधि
काम की तलाश या काम के लिए उपलब्धता
कार्यस्थल तक आने-जाने की जानकारी
जन्म स्थान
अंतिम निवास स्थान
प्रवास का कारण
अंतिम प्रवास के बाद इस गांव/शहर में रहने की अवधि
स्थायी आवासीय पता
वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या — वर्तमान में विवाहित, विधवा, तलाकशुदा एवं अलग रह रही महिलाओं के लिए
अब तक जीवित जन्मे बच्चों की संख्या — संबंधित महिलाओं के लिए
पिछले एक वर्ष में जीवित जन्मे बच्चों की संख्या — वर्तमान में विवाहित महिलाओं के लिए
कोविड-19 टीकाकरण का स्थान
कुल बैंक खातों की संख्या
मोबाइल नंबर — यदि उपलब्ध हो
आधार नंबर — यदि उपलब्ध हो
मतदाता पहचान पत्र संख्या — यदि उपलब्ध हो
पासपोर्ट नंबर — यदि भारतीय पासपोर्ट धारक हों
ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
जाति गणना का ऐतिहासिक महत्व
जाति गणना सबसे बड़ा बदलाव
जनगणना-2027 में जाति को खुले कॉलम के जरिए दर्ज करने का निर्णय स्वतंत्र भारत की जनगणना व्यवस्था में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। अब तक स्वतंत्र भारत में नियमित जनगणना के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आंकड़े दर्ज किए जाते रहे हैं, लेकिन पहली बार अन्य सभी जातियों की भी गणना की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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