लालगंज के बसंता महादेव घाट पर सृष्टि का आदि पर्व श्रावणी उपाकर्म मनाया गया
लालगंज में नारायणी नदी के बसंता महादेव घाट पर श्रावणी उपाकर्म श्रद्धा प्रेम के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने संकल्प, प्रायश्चित, स्नान, पूजन एवं तर्पण किया। अखिल भारतीय धर्मसंघ के अध्यक्ष ने चार वर्णों एवं उनके पर्वों के महत्व के बारे में बताया। महत्वपूर्ण यज्ञोपवीत समारोह में अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

लालगंज में नारायणी नदी के बसंता महादेव घाट पर सृष्टि का आदि पर्व श्रावणी उपाकर्म श्रद्धा प्रेम के साथ मनाया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संकल्प, प्रायश्चित, दस विध स्नान, सप्तर्षियों सहित देव, पितर का पूजन, तर्पण, हवन किया। यज्ञोपवीत के नौ तंतुओं का पूजन कर नया यज्ञोपवीत धारण कर रक्षा सूत्र बांधा।
श्रावणी उपाकर्म का महत्व
इस मौके पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय धर्मसंघ के प्रांतीय अध्यक्ष पंडित रमाशंकर शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म में चार वर्ण हैं। शास्त्रों ने चार वर्णों के लिए मुख्य रूप से चार पर्वों की व्यवस्था दी है। श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मण वर्ण का मुख्य पर्व है। विजयादशमी क्षत्रियो का,दिवाली वैश्यों का,होली शूद्रों का मुख्य पर्व है।
पवित्र स्थलों पर धार्मिक क्रियाकलाप
श्रावणी में किसी पवित्र नदी के किनारे अथवा किसी पवित्र स्थान पर श्रद्धालु संकल्प, प्रायश्चित के बाद पंचगव्य, पंचामृत, सर्व औषधि, भस्म, फल का रस से स्नान कर देवता, ऋषि, पितरों का पूजन, तर्पण करते हैं। सप्तऋषियों के पूजन के बाद यज्ञोपवीत के नौ तंतुओं का पूजन, हवन करने के बाद नया यज्ञोपवीत धारण कर रक्षा सूत्र बांधते हैं। उन्होंने कहा कि जो ब्राह्मण वर्ण में जन्म लेकर श्रावणी, संध्योंपासन नहीं करता है,उसे दिया गया दान कल्याणकारी नहीं होता।
श्रद्धालुओं का सहभागिता
श्रावणी उपाकर्म में आचार्य विजय पांडेय, अमरकांत तिवारी, शिवप्रसाद मिश्र, प्रो.राजेश कुमार,रविन्द्र कुमार,राजू Kumar Singh,आकाश ब्रह्मचारी,पंकज कुमार,शंभू सिंह आदि ने भाग लिया। - दिलीप कुमार


