संस्कृत दिवस समारोह, मूल भाषा में शास्त्रों को जानने पर जोर
देहरादून में आयुर्वेद विवि के परिसर में मंगलवार को संस्कृत दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और नाटकों का मंचन हुआ। वक्ताओं ने संस्कृत के महत्व पर जोर दिया और इसे भारतीयता का अभिन्न हिस्सा बताया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने 'कर्णस्य द्वंद्वम्' नाटक का शानदार प्रदर्शन किया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नाटकों के मंचन ने बांधा समां फोटोदेहरादून, वरिष्ठ संवाददाताआयुर्वेद विवि के मुख्य परिसर हर्रावाला में मंगलवार को संस्कृत दिवस समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुनील पाण्डेय, डॉ. प्रबोध येरावर, डॉ. आकांक्षा अनुपम, डॉ. अर्चना सिंह व डॉ. प्रदीप सेमवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।संहिता सिद्धांत एवं संस्कृत विभाग के डॉ. प्रदीप सेमवाल ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राण भाषा है और इसके बिना भारतीयता की कल्पना संभव नहीं है। डॉ. प्रबोध येरावर ने संस्कृत को समस्त विद्याओं और आयुर्वेद का मूल बताया। डॉ. एस.पी. सिंह ने श्लोक-मंत्र वाचन से बुद्धि विकास पर जोर दिया, जबकि डॉ. अर्चना सिंह ने कहा कि चिकित्सक को आयुर्वेद की आत्मा समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है।
डॉ. दीपक सेमवाल ने राज्य की द्वितीय राजभाषा संस्कृत में रोजगार अवसर बढ़ाने की बात कही। डॉ. आशुतोष चौहान और डॉ. सुनील पाण्डेय ने भी विचार व्यक्त किए। समारोह में धन्वंतरि वंदना, ध्येय मंत्र और सोनिया व अभिषेक द्वारा 'शिव तांडव स्तोत्र' की प्रस्तुति दी गई। छात्रों ने श्रीकृष्ण-कर्ण संवाद पर आधारित 'कर्णस्य द्वंद्वम्' नाटक का शानदार मंचन किया। कार्यक्रम का संचालन दीक्षा व अरीना ने किया।


