डुमरी गुरुद्वारा में मना गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाशोत्सव
डुमरी तीन नंबर गुरुद्वारा में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर संगत के बीच लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया और अटूट लंगर का आयोजन किया गया। ज्ञानी मंगल सिंह ने गुरु नानक देव जी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला। धार्मिक कार्यक्रम में कई भक्तों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

डुमरी तीन नंबर गुरुद्वारा में रविवार को गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश उत्सव मनाया गया। मौके पर गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी को फूलों से सजाया गया। विशेष अरदास के बाद संगतों के बीच लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया और इसके बाद अटूट लंगर का आयोजन हुआ। धार्मिक दीवान में स्त्री सत्संग की प्रवजोत कौर ने सबद-कीर्तन प्रस्तुत कर उपस्थित संगत को निहाल कर दिया। इसके बाद ज्ञानी मंगल सिंह ने संगत को गुरु नानक देव जी के जीवन और उनके विचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी को बाबा नानक और नानकशाह के नाम से भी संबोधित किया जाता है।
वे अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्म सुधारक, समाज सुधारक, कवि, देशभक्त और विश्व बंधु जैसे अनेक गुणों को समेटे हुए थे। उन्होंने पूरे विश्व का भ्रमण कर मानवता को प्रेम, भाईचारे और समानता का संदेश दिया। उन्होंने प्रत्येक सिख से ‘गुरु मान्यो ग्रंथ’ के सिद्धांत का पालन करने और नशे की सामाजिक बुराई से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में मंजीत कौर, हरबंस कौर, सीमा कौर, रीना कौर, परमजोत कौर, पोली कौर, रिंकी कौर, पम्मी कौर, कुलविंदर कौर का सराहनीय योगदान रहा।


