डीएसपीएमयू में प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर व्याख्यान
रांची, विशेष संवाददाता। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर 'प्रेमचंद और भारतीय समाज' विषय पर व्याख्यान हुआ। रजिस्ट्रार डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने प्रेमचंद की साहित्यिक प्रासंगिकता और समाज में उनके योगदान की चर्चा की। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने प्रेमचंद के कार्यों पर प्रकाश डाला।

रांची, विशेष संवाददाता। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शुक्रवार को प्रेमचंद व भारतीय समाज विषय पर व्याख्यान हुआ। इसमें उनके साहित्यिक अवदान को याद किया गया। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा कि साहित्य सबके हित के लिए होता है। साहित्य की प्रासंगिकता तभी है जब वह त्रिकालवाध्य न हो। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद सर्वमान्य लेखक थे। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जिंदर सिंह मुंडा ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय साहित्य के वैश्विक लेखक हैं। उन्होंने पहली बार अपनी रचनाओं में भारतीय समाज की असली तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद स्त्री, दलित, किसान, मजदूर, पिछड़े और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े जनमानस के रहनुमा बने।
डॉ मृत्युंजय कोइरी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं से ही साहित्य में विविध विमर्श की परंपरा शुरू होती है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में जो पात्र गढ़े वे आदर्श बन गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ विजय कुमार व संजय साहू ने किया।


