सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा अखंड सौभाग्य
पेज तीन की लीड त्रों तक महिलाओं ने पूरे दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। शाम को महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर तीज व्रत की कथा सुनी। इस दौरान तीज के गीतों...

पेज तीन की लीड सोलह शृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की तीज के गीतों से घर-आंगन और पूजा स्थल भक्तिमय हो उठे 22 शहर के मंदिर में तीज का कथा सुनती व्रती महिलाएं छपरा, हमारे प्रतिनिधि। पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक महिलाओं ने पूरे दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की। शाम को महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर तीज व्रत की कथा सुनी। इस दौरान तीज के गीतों से घर-आंगन और पूजा स्थल भक्तिमय हो उठे। धर्मनाथ मंदिर, मासूमेश्वर मंदिर, शिवशक्ति मंदिर, महिला थाना स्थित शिव मंदिर समेत विभिन्न शिव मंदिरों में महिलाओं ने हरितालिका व्रत कथा सुनी और आशीष मांगा।
हरतालिका तीज का व्रत
हरतालिका तीज का व्रत 24 घंटे का निर्जला उपवास होता है। अगले दिन जल ग्रहण कर पारण के साथ व्रत पूरा किया जाता है। पारण से पूर्व व्रती महिलाएं सौभाग्य सामग्री, द्रव्य और वायन को स्पर्श कर ब्राह्मणों को दान करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और जीवन में संतुलन बना रहता है। निर्जला व्रत कर पति का आरोग्य व दीर्घायु मांगा हरतालिका तीज के अवसर पर व्रती महिलाओं ने सोलह शृंगार किया। हाथों में मेहंदी रचाई और पैरों में महावर लगाया। महिलाओं ने हरे-लाल नवीन वस्त्र धारण कर पूजा की तैयारी की। पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विशेष रूप से आराधना की गई। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने जंगल में अन्न-जल का त्याग कर कई दिनों तक ध्यान और उपवास किया था। उनकी इसी तपस्या की स्मृति में हरतालिका तीज पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं।
शरीर, मन और आत्मा के संयम की साधना
तीज शब्द तृतीया तिथि से निकला है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत शरीर, मन और आत्मा के संयम की साधना का प्रतीक है। निर्जला व्रत से शरीर का संयम, कामना का त्याग कर मन का अनुशासन और प्रेम-भक्ति के माध्यम से आत्मकल्याण की भावना जुड़ी है। व्रत रखने वाली महिलाओं का विश्वास है कि पूरी श्रद्धा और निष्ठा से भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
कन्याओं के लिए विशेष महत्व
कन्याओं के लिए भी हरतालिका तीज का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं द्वारा श्रद्धापूर्वक यह व्रत करने से उन्हें उत्तम वर और शुभ संतान की प्राप्ति होती है। वहीं, वैवाहिक जीवन में परेशानी या कलह से गुजर रही महिलाएं भी माता पार्वती की पूजा कर दांपत्य जीवन में सुख-शांति और मंगल की कामना करती हैं। लोक और कुल परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन व्रत का मूल भाव शिव-पार्वती के प्रेम, भक्ति और आशीर्वाद से जुड़ा है।
हरितालिका तीज का पर्व
पति की दीर्घायु की कामना दाउदपुर(मांझी)/एकमा। मांझी और एकमा प्रखंड के सभी गांवों में सोमवार को हरितालिका तीज का पर्व पारंपरिक तरीके और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना को लेकर चहल-पहल रही। महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर तीज व्रत की कथा सुनी।


