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आरोप : मुलायम के मामले में सीबीआई ने अदालत को गुमराह किया

mulayam singh yadav

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार की आय से अधिक संपत्ति मामले में उच्चतम न्यायालय में नया मोड़ आ गया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी का आरोप है कि सीबीआई ने अदालत को गुमराह किया कि उसने जांच बंद करने की जानकारी सीवीसी को दी थी।

चतुर्वेदी ने अदालत में दायर प्रत्युत्तर शपथपत्र में कहा है कि सीबीआई ने 26 अक्तूबर 2007 को दायर प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि मुलायम व उनके परिवार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है। लेकिन जब मामला 8 अक्तूबर 2013 को बंद किया तो नहीं बताया कि यह किन आधार पर किया।

सीबीआई ने मामले में सालिसिटर जनरल (एसजी) की इस राय ली जिसमें बताया गया आय और संपत्तियों को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि उनकी आय का मूल्यांकन अलग से किया जाता है। लेकिन सीबीआई ने 11 साल बाद भी यह खुलासा नहीं किया कि एसजी ने क्या राय दी थी। उन्होंने कहा कि सीवीसी को जांच बंद करने की जानकारी देने की बात भी झूठी थी। आयुक्त ने आरटीआई अर्जी के जवाब में कहा है कि उसे ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई।

कोई रिपोर्ट पेश नहीं की: समीक्षा याचिका में दिए गए फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में डिंपल यादव को इस मामले से निकाल दिया था। सीबीआई ने खुद कहा है कि उसने न तो मजिस्ट्रेट, न सर्वोच्च न्यायालय में कभी कोई रिपोर्ट पेश की और न ही याचिकाकर्ता को दी। लेकिन समीक्षा याचिका का फैसला कमोबेश इन्हीं रिपोर्ट पर आधारित है।

सर्वोच्च न्यायालय से कार्रवाई करने की मांग
सर्वोच्च न्यायालय से मांग की गई है कि सीबीआई के अधिकारियों को कोर्ट को जांच की सही स्थिति बताने का आदेश दिया जाए तथा कोर्ट को गुमराह करने के वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। मामले की सुनवाई अगले माह होगी। सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मार्च में सीबीआई को नोटिस जारी कर मुलायम सिंह, अखिलेश यादव और प्रतीक यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के बारे में की गई जांच की स्थिति पर जवाब मांगा था। 

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  • Web Title:CBI Misguide Supreme Court In Mulayam Singh Yadav Case