ईपीएफओ धोखाधड़ी में नोकिया के दो कर्मचारियों पर केस दर्ज
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ 19.33 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने 94 फर्जी कर्मचारी खातों के माध्यम से पैसे ट्रांसफर किए। नोकिया ने आंतरिक ऑडिट कर आरोपियों को निलंबित कर दिया है।

मुंबई, एजेंसी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से करीब 19.33 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने इस मामले में वैभव वर्मा और कमाराजू मुत्याला को आरोपी बनाया है। वर्मा कंपनी में पेरोल क्लस्टर लीड के पद पर थे, जबकि मुत्याला पेरोल मैनेजमेंट हेड के रूप में कार्यरत थे। इनके अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है。
जांच का घटनाक्रम
जांच के अनुसार, वर्ष 2023 से 2024 के बीच आरोपियों ने कथित तौर पर 94 फर्जी कर्मचारी खातों में भविष्य निधि की 19.33 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब ईपीएफओ की फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट कमेटी ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की। जांच में पहले संदिग्ध पाए गए 70 खातों में से 66 खातों का नोकिया के साथ कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं मिला। आगे की जांच में 28 और फर्जी सदस्य सामने आए, जिससे ऐसे खातों की कुल संख्या 94 हो गई।
नोकिया की आंतरिक जांच
नोकिया ने भी आंतरिक फोरेंसिक ऑडिट कराया, जिसमें वैभव वर्मा और कामराजू मुत्याला को फर्जी ट्रांसफर संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने और प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार प्रमुख अधिकारी बताया गया। ऑडिट में यह भी सामने आया कि ईपीएफओ को दस्तावेज जमा करने के तुरंत बाद आरोपियों के लैपटॉप से संबंधित फाइलें हटा दी गई थीं। प्राथमिकी के अनुसार, फोरेंसिक जांच में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक संचार मिले जिनमें नोकिया के कर्मचारी नहीं होने वाले व्यक्तियों का विवरण, उनकी रोजगार स्थिति की झूठी पुष्टि और आधिकारिक लॉगिन का इस्तेमाल कर फर्जी खातों के लिए केवाईसी मंजूर किए जाने के साक्ष्य मिले। आंतरिक जांच के निष्कर्षों के बाद नोकिया ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी। ईपीएफओ को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ब्याज सहित करीब 20 करोड़ रुपये संगठन के पास जमा करा दिए हैं。


