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सीबीआई विवाद: SC में आलोक वर्मा ने बहस के दौरान सरकार के आदेश पर नहीं की रोक लगाने की मांग

CBI director Alok Verma (in picture) and his deputy Rakesh Asthana were divested of all duties late

केन्द्रीय जांच ब्यूरो को लेकर व्याप्त विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को तेजी से हुई सुनवाई के दौरान जांच ब्यूरो के मुखिया आलोक वर्मा को उनके अधिकारों से वंचित कर उन्हें अवकाश पर भेजने के सरकार के आदेश पर रोक लगाने के लिये कोई जिक्र ही नहीं हुआ। हालांकि आलोक वर्मा ने अपनी याचिका में केन्द्र के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ के समक्ष आलोक वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरिमन ने बहस की लेकिन इस दौरान सरकार के 23 अक्टूबर के आदेश पर रोक लगाने का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

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नरिमन ने अपनी दलील में उच्च पदों पर आसीन लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से संबंधित विनीत नारायण प्रकरण में शीर्ष अदालत के 1997 के फैसले, केन्द्रीय सतर्कता आयोग कानून, 2003 और सीबीआई से संबंधित दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून में संशोधनों का हवाला दिया।

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उन्होंने कहा कि इस कानून के प्रावधानों के अनुरूप प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधान न्यायाधीश की तीन सदस्यीय चयन समिति जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति दो साल के लिये करती है और ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि क्या इस कार्यकाल को बीच में ही बाधित किया जा सकता है? उनका तर्क था कि जांच ब्यूरो के निदेशक का स्थानांतरण करने के लिये इस समिति की सहमति आवश्यक है। 

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हालांकि, सरकार के आदेश पर रोक लगाने का मुद्दा न्यायालय में उठने से पहले ही पीठ ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि वह इन मुद्दों की विवेचना करेगी। प्रधान न्यायाधीश ने वेणुगोपाल से कहा, ''हमें सिर्फ यह देखने की आवश्यकता है कि क्या अंतरिम आदेश दिया जाए। समय बर्बाद किये बगैर ही हम आपको बताना चाहते हैं कि हमारे दिमाग में क्या है। पीठ ने कहा कि सीवीसी की जांच दस दिन के भीतर पूरी होनी चाहिए और इसकी निगरानी शीर्ष अदालत के एक न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए तथा राव कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे। 
 

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  • Web Title:CBI Chief Alok Verma During Argument in Supreme Court no discussion on ban of government order