कैंटीन के वेटर से कार्यालय अधीक्षक तक पहुंचा था रेलकर्मी राजेंद्र
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता।सीबीआई के रिश्वत कांड में गिरफ्तार होकर जेल पहुंचे सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) अरविंद कुमार और कार्यालय अधीक्षक राजेंद्

प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। सीबीआई के रिश्वत कांड में गिरफ्तार होकर जेल पहुंचे सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) अरविंद कुमार और कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी की जोड़ी करीब एक साल से प्रयागराज मंडल के कार्मिक विभाग में साथ काम कर रही थी। विभाग में दोनों की नजदीकी को लेकर चर्चा थी और अब रिश्वत मामले में दोनों के एक साथ गिरफ्तार होने के बाद इस जोड़ी के कामकाज पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजेंद्र मणि त्रिपाठी का करियर
सूत्रों के अनुसार राजेंद्र मणि त्रिपाठी रेलवे में अस्थायी नियुक्ति से नौकरी की शुरुआत करने के बाद कई पदोन्नतियां पाकर कार्यालय अधीक्षक के पद तक पहुंचे थे। उत्तर मध्य रेलवे के तत्कालीन मुख्य अभियंता के आदेश पर 12 मई 2011 को उन्हें टीएडीआर के तहत 4440-4740 वेतनमान पर रखा गया था। निर्धारित 120 दिन की ड्यूटी पूरी करने के बाद उन्हें रेलवे के ग्रुप डी में नियुक्ति मिल गई। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्हें कैंटीन में वेटर का काम मिला। 2015 में वह कार्मिक विभाग में आ गए। इसके बाद विभागीय परीक्षा और पदोन्नति के जरिए वह लिपिक कम टाइपिस्ट बने। एक जुलाई 2024 को उनकी आखिरी पदोन्नति हुई, जिसके बाद वह कार्यालय अधीक्षक बन गए और एपीओ के साथ काम करने लगे।
एपीओ अरविंद कुमार की ट्रांसफर कहानी
इसी दौरान एपीओ अरविंद कुमार का आगरा मंडल से प्रयागराज मंडल में तबादला हुआ। सूत्रों के अनुसार प्रयागराज आने के बाद शुरुआत में उन्हें डीआरएम कार्यालय में एपीओ मेडिकल का कार्यभार दिया गया था। बाद में उन्हें इलेक्ट्रिक विभाग से जुड़े कार्मिक मामलों की जिम्मेदारी भी मिल गई। इसी दौरान कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी के साथ उनकी नजदीकी बढ़ी और दोनों एक साथ विभागीय कामकाज देखने लगे।
आगरा वापस जाने की जुगाड़ में थे एपीओ
विभागीय सूत्रों के अनुसार अरविंद कुमार आगरा मंडल में चार साल से अधिक समय तक तैनात रहे थे और वहां से प्रयागराज आना नहीं चाहते थे। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उनका तबादला प्रयागराज कर दिया गया। यहां आने के बाद भी वह दोबारा आगरा लौटने के लिए प्रयासरत थे, लेकिन उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि प्रयागराज में तैनाती के दौरान उन्हें अभी सरकारी आवास भी आवंटित नहीं हुआ था और वह ट्रांजिट हॉस्टल में रह रहे थे।


