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सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडरों के लिए 1% कोटा सुनिश्चित करे सरकार: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडरों के लिए 1% कोटा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। यह आदेश एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका पर फैसला सुनाते हुए दिया गया है।

सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडरों के लिए 1% कोटा सुनिश्चित करे सरकार: कलकत्ता हाईकोर्ट
Jagritiलाइव हिंदुस्तान,पश्चिम बंगालMon, 17 Jun 2024 10:46 AM
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को राज्य में सभी सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक प्रतिशत का आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि हालांकि राज्य सरकार ने ट्रांसजेंडरों के लिए रोजगार में समान व्यवहार की नीति अपनाई है, लेकिन उनके लिए अभी तक आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। जस्टिस राजशेखर मंथा ने पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को सभी सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडरों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह आदेश एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका के बाद दिया गया है। यह व्यक्ति टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) 2014 और टीईटी 2022 में भी सफल हुआ था, लेकिन उसे काउंसलिंग या इंटरव्यू के लिए बुलाया ही नहीं गया।

शुक्रवार को पारित आदेश में जस्टिस मंथा ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले का भी जिक्र किया। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि हिजड़ों और किन्नरों की थर्ड जेंडर के रूप में पहचान की जाए ताकि संविधान के भाग III के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खुद पहचाने गए लिंग को तय करने के अधिकार को भी बरकरार रखा था। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को उनके लिंग पहचान को पुरुष, महिला या थर्ड जेंडर के रूप में कानूनी मान्यता प्रदान करने का निर्देश दिया था।

जस्टिस मंथा ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को उनके लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नागरिकों के वर्ग के रूप में कदम उठाने की बात की थी। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सार्वजनिक नियुक्तियों के मामलों में सभी प्रकार के आरक्षण के लिए प्रावधान बनाने का निर्देश दिया था।

"याचिकाकर्ता के साक्षात्कार और काउंसलिंग की व्यवस्था करें"

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य के महिला और बाल विकास और समाज कल्याण विभाग ने 30 नवंबर, 2022 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके मुताबिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के रोजगार के समान अवसर का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अधिसूचना से यह स्पष्ट है कि राज्य ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए रोजगार में समान व्यवहार की नीति अपनाई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में अभी तक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आरक्षण नहीं किया गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव को विशेष तौर पर याचिकाकर्ता के साक्षात्कार और काउंसलिंग की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।

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