DA Image
21 जनवरी, 2020|7:57|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

केंद्र सरकार की योजना मकसद में कामयाब हुई या नहीं, जांचेगा कैग

कैग

अब तक सिर्फ योजनाओं के अनुपालन और प्रदर्शन का ऑडिट करने वाला भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) आने वाले समय में इस बात की भी ऑडिट करेगा कि कोई योजना अपने मकसद में कामयाब हुई भी या नहीं। कैग ने इस आउटकम ऑडिट के लिए खुद को सक्षम बनाने के लिए तैयारी भी शुरू कर दी हैं। कैग अगले साल से आउटकम ऑडिट शुरू कर सकता है।

कैग के आला अधिकारी ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि कैग ने समय के साथ अपनी ऑडिटर की भूमिका में विस्तार किया है। एक समय था कि जब कैग सिर्फ कंप्लायंस ऑडिट करता था कि कोई विभाग नियमों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। एक दशक पहले कैग ने दायरा बढ़ाते हुए परफॉर्मेंस ऑडिट शुरू किया था। इसी की वजह से 2जी घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला और कोलगेट जैसे घोटाले सामने आए थे। अधिकारी ने कहा कि अब अपना दायरा और बढ़ाते हुए कैग किसी योजना की कामयाबी या नाकामी का भी ऑडिट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारी ने बताया कि वर्तमान कैग राजीव महर्षि खुद इसमें रुचि ले रहे हैं। उन्होंने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले इसे शुरू करने का निर्देश दिया है।    

क्या दिक्कतें आएंगी   
आउटकम ऑडिट शुरू करने में सबसे बड़ी समस्या ये है कि कैग के वर्तमान अधिकारियों के पास आउटकम ऑडिट करने का अनुभव नहीं है। साथ ही आउटकम ऑडिट के लिए काफी संख्या में मानव संसाधन की जरूरत होगी, जो कैग के पास नहीं है। सूत्रों की मानें तो इस अड़चन को दूर करने के लिए कैग अपने अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देगा। इसके अलावा किसी बाहरी एजेंसी को सर्वे जैसे कामों के लिए भी नियुक्त किए जाने पर भी चर्चा चल रही है।

आउटकम ऑडिट के फायदे
आउटकम ऑडिट का सबसे अधिक फायदा लोगों से सीधे जुड़े मंत्रालयों जैसे कि स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय को होगा। आउटकम ऑडिट होने से वे जान सकेंगे कि उनकी योजनाओं से वास्तव में लाभार्थियों को कितना लाभ पहुंचा। इससे वे अपनी गलतियां सुधार सकेंगे और योजना का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:CAG will examine central government schemes