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7 अप्रैल, 2020|10:52|IST

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CAA और NRC पर बोले जमीयत प्रमुख मौलाना मदनी, भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की कोशिश

maulana arshad madani   pti file photo

देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बृहस्पतिवार (20 फरवरी) को दावा किया कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) 'सांप्रदायिक' एजेंडे हैं जिनके तहत देश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान से वंचित करने तथा भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने का प्रयास हो रहा है।

जमीयत की कार्यकारिणी की बैठक और अधिवेशन से पहले मदनी ने यह उम्मीद भी जताई कि सीएए के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय बेहतर और स्वीकार्य निर्णय देगा। उन्होंने कहा, ''देश में राजनीतिक फायदे के लिए कुछ लोग अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच दीवार खड़ी करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे देश के हालात चिंताजनक हो रहे हैं।"

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मौलाना मदनी ने दावा किया, ''एनआरसी, सीएए और एनपीआर सांप्रदायिक एजेंडे के तहत लाए गए हैं। इस एजेंडे के तहत भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने और धार्मिक अल्पसंख्यकों को उनकी पहचान से वंचित करने का प्रयास हो रहा है।" उन्होंने कहा, ''कार्यकारिणी की बैठक और अधिवेशन में इन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के साथ ही कई अन्य मसलों पर भी बातचीत होगी।"

सीएए पर महिलाओं के आंदोलन को जमीयत का समर्थन
वहीं दूसरी ओर, जमीयत उलेमा-ए-हिंद (महमूद मदनी गुट) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी की गुरुवार को देवबंद में आयोजित बैठक में सीएए को संविधान विरोधी बताया गया। इस दौरान जमीयत पदाधिकारियों ने घोषणा करते हुए कहा कि देश में जहां-जहां भी महिलाएं आंदोलन कर रही हैं, वहां जमीयत उनका पूर्ण समर्थन करने का वायदा करती है।

गुरुवार को शेखुल हिंद हॉल में आयोजित जमीयत के पश्चिमी उत्तर प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद आकिल ने कहा कि सीएए के खिलाफ जमीयत का आंदोलन जारी है। उन्होंने कहा कि जमीयत 22 दिसंबर से मुहिम चला रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव मोहम्मद यामीन और सचिव मोहम्मद जाकिर ने कहा कि सीएए के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराने के लिए जमीयत गांव-गांव अभियान चलाएगी।  

सीएए के खिलाफ पांच सदस्य कमेटी का चयन
जमीयत पश्चिमी उत्तर प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में सर्वसम्मति से सीएए के खिलाफ देवबंद में एक बड़ा धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर बैदारी मुहिम चलाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए पांच सदस्य कमेटी का गठन भी हुआ।

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