गंधकुटी पर फूलों की विशेष पूजा की गई
श्रावस्ती में बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो की अध्यक्षता में श्रीलंका के 200 और मलेशियाई के 35 अनुयाइयों ने फूल पूजा की। भिक्षु ने भारतीय संस्कृति में पुष्प के महत्व को बताते हुए कहा कि पुष्प देवताओं को प्रसन्न करते हैं और धार्मिक अनुष्ठान के लिए आवश्यक होते हैं। अनुयायियों ने पूजा के बाद महत्वपूर्ण स्थलों की परिक्रमा की।

श्रावस्ती। बौद्ध स्थली श्रावस्ती में शनिवार को बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो की अध्यक्षता मे श्रीलंका के 200 बुद्ध अनुयाई और मलेशियाई के 35 अनुयाई ने गंधकुटी पर फूल पूजा किया। इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक ने कहा कि इस दौरान बौद्ध भिक्षु श्रद्धा लोक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुष्प का उच्च स्थान है। देवी-देवताओं और भगवान् पर आरती, व्रत, उपवास या पर्वो पर पुष्प चढ़ाए जाते हैं। धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार, सामाजिक व पारिवारिक कार्यों को बिना पुष्प अधूरा समझा जाता है। पुष्पों की सुगंध से देवता प्रसन्न होते हैं। सुंदरता के प्रतीक पुष्प हमारे जीवन में उल्लास, उमंग, प्रसन्नता के प्रतीक हैं।
पुष्प के संबंध में कहा गया है।पुष्प को बढ़ाने, पापों को भगाने और श्रेष्ठ फल को प्रदान करने के कारण यह पुष्प कहा जाता है। भगवान को जो पुष्पों की मालाएं चढ़ाई जाती हैं उनमें कमल अथवा पुंडरीक की माला को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। वहीं पूजन के उपरांत अनुयायियों ने परिक्रमा किया और उद्घोष किया बुद्धम शरणम संघम शरणम गच्छामि धम्मम शरणम गच्छामि। और भ्रमण के दौरान कौशाबी कुटी, बोधि वृक्ष, सूर्यकुंड , शिवली स्तूप ,कच्ची कुटी पक्की कुटी के इतिहास की जानकारी प्राप्त की।


