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कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकारः दिन, साल या पूरा कार्यकाल, जानें क्या हैं आसार

BS yeddyurappa

कर्नाटक चुनाव के बाद मतगणना में सबसे ज्यादा सीटों के साथ सत्ता पर काबिज हो चुके येदियुरप्पा का इतिहास उनका पीछा छोड़ेगा या फिर वे नया इतिहास रचने में कामयाब रहेंगे? दरअसल हम येदियुरप्पा के बतौर मुख्यमंत्री कार्यकाल के बारे में बात कर रहे हैं। येदियुरप्पा अबतक दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद का पदभार संभाल चुके हैं। मुख्यमंत्री के रूप में ये उनका तीसरा कार्यकाल है।

अब तक 3 साल 71 दिन ही मुख्यमंत्री रहे हैं येदियुरप्पा

उनके दोनों पिछले कार्यकालों की बात करें तो वे कुल तीन साल 71 दिन ही मुख्यमंत्री रहे हैं। वे अपना कोई भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। पहली बार येदियुरप्पा ने 12 नवंबर 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और आठवें ही दिन 19 नवंबर 2007 को उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़े देनी पड़ी थी। ये वो वक्त था जब येदियुरप्पा और एचडी कुमारास्वामी को समझौते के तहत बराबर-बराबर अवधि के लिए मुख्यमंत्री पद साझा करना था।

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कुमारास्वामी से मतभेद के बाद देना पड़ा था इस्तीफा

येदियुरप्पा ने एचडी कुमारस्वामी को समर्थन देकर फरवरी 2006 में मुख्यमंत्री पद पर बैठाया था। अक्टूबर 2007 में येदियुरप्पा को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनना था लेकिन कुमारस्वामी ऐसा नहीं किया। येदियुरप्पा ने समर्थन वापस लेते हुए कुमारास्वामी को सीएम की कुर्सी से चलता कर दिया। दोनों नेताओं के रिश्ते में आई दूरी के चलते तब कर्नाटक में तकरीबन एक महीने तक राष्ट्रपति शासन लागू था।

बतौर सीएम कुछ दिनों का था पहला कार्यकाल 

नवंबर 2007 में कुमारास्वामी ने येदियुरप्पा को समर्थन देने की हामी भरी तब राज्य में राष्ट्रपति शासन खत्म हुआ। 12 नवंबर 2007 को येदियुरप्पा पहली बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के पद पर उनका पहला कार्याकाल ज्यादा दिन तक नहीं चला। मंत्रालयों के बंटवारे में आए मतभेद के चलते येदियुरप्पा ने  कु्मारास्वामी से नाता तोड़ 19 नवंबर 2007 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।

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दूसरी बार भी कुछ साल के लिए रहे सीएम

वर्ष 2008 में येदियुरप्पा की किस्मत एक बार फिर चमकी जब राज्य में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की थी। 30 मई 2008 को येदियुरप्पा ने दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इस बार भी वे मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरी नहीं कर सके। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें 31 जुलाई 2011 को इस्तीफा देना पड़ा।

तोड़ दिया था भाजपा से नाता

तब उन्होंने भाजपा से नाता तोड़ अपनी अलग पार्टी तैयार कर ली थी। सब सही होने पर वर्ष 2014 में येदियुरप्पा ने एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया। अब 17 मई 2018 को वे तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने हैं। वे मुख्यमंत्री तो जरूर बन गए हैं लेकिन अब भी उनके रास्ते में कई रोड़े हैं। उन्हें 15 दिन के अंदर बहुमत साबित करना है। लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के विधायक नहीं टूटे तो येदियुरप्पा के लिए सीएम की कुर्सी बचा पाना बहुत ही मुश्किल हो सकता है। 

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अब भी बड़ी चुनौती

बहुमत का आंकड़ा जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। भाजपा को सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद कांग्रेस ने बुधवार आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। देर रात 2:11 बजे से सुबह 5:58 बजे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने शपथग्रहण पर रोक लगाने की कांग्रेस की मांग को खारिज कर दिया था। 

बहुमत से दूर

येदियुरप्पा को राज्यपाल वजुभाई वाला ने राजभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। फिलहाल अकेले ही शपथ लेने वाले येदियुरप्पा के पास विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय है। सदन में भाजपा के पास 104 विधायक हैं जो बहुमत के 112 के आंकड़े से आठ विधायक कम है। कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीटों के लिए मतदान हुआ था।

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