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ब्रिटानिया को लेकर टीएमसी और भाजपा आमने-सामने, ममता सरकार पर लगे गंभीर आरोप

ब्रिटानिया का सबसे पुराना तारातल प्लांट जो बिस्कुट बनाने के के लिए मशहूर था। इस प्लांट में अब ताला लग गया है। राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा ने इसका ठीकरा टीएमसी की कट मनी पॉलिसी पर फोड़ा है।

ब्रिटानिया को लेकर टीएमसी और भाजपा आमने-सामने, ममता सरकार पर लगे गंभीर आरोप
Upendra Thapakलाइव हिन्दुस्तान,कोलकाताTue, 25 Jun 2024 12:09 AM
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 ब्रिटानिया की फैक्ट्री के कोलकाता में बंद होने को लेकर भाजपा ने टीएमसी की सरकार पर हमला बोला है। ब्रिटानिया ने घोषणा की है कि उसके फैक्ट्री के सभी कर्मचारियों को वीआरएस पर भेजा जा रहा है और फैक्ट्री का प्रोडक्शन बंद रहेगा। भाजपा आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि फैक्ट्री का बंद होना वास्तव में बंगाल के पतन का प्रतीक है, एक ऐसा राज्य जो कभी अपनी समृद्धि के लिए मशहूर था वह आज अव्यवस्था की वजह से पतन के रास्ते पर है।

तारातल प्लांट ब्रिटेनिया की सबसे पुरानी फैक्ट्रियों में से एक है। यह पिछले 7 दशक से लगातार उत्पादन कर रही है। जबकि अभी पिछले 20 दिनों से कंपनी का प्रोडक्शन बंद है। कंपनी के CIUT लीडर गौतम राय ने कहा कि कंपनी ने अभी तक बंद को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ब्रिटेनिया मैनेजमेंट ने कर्मचारियों के बाकी बचे 5 साल 11 महीने के कार्यकाल के लिए 13 लाख रुपय देने का वादा किया है। जिस भी कर्मचारी की नौकरी अभी 6 से 10 साल तक बाकी है उसे 18.5 लाख रुपय, 10साल से ज्यादा बाकी कार्यकाल वाले कर्मचारी को 22.25 लाख रुपय देने का वादा किया है।

मालवीय ने फैक्ट्री बंद होने का ठीकरा सीपीआईएम की यूनियनबाजी और टीएमसी की कट मनी पॉलिसी पर फोड़ा। भाजपा के एक नेता ने कहा कि ब्रिटानिया फैक्ट्री जो कभी बंगाल में औद्योगिक जीवन शक्ति का प्रतीक थी, उसे पहले सीपीआई (एम) की यूनियनबाजी और फिर बाद में टीएमसी की अथक   'कट मनी' का सामना करना पड़ा। टीएमसी की कट मनी पॉलिसी  फैक्ट्री के ताबूत में आखिरी कील साबित हुई। मालवीय ने कहा कि इस फैक्ट्री के बंद होने के बाद प्रदेश में रोजगार की स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। 

मालवीय ने कहा, "बंगाल, पहले से ही टीएमसी की जबरन वसूली और सिंडिकेट के कारण गंभीर बेरोजगारी में डूबा हुआ है, अब कारखाने के बंद होने से और भी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है। दुर्भाग्य से, बंगाल की नियति अब 'यूनियनबाजी' और 'कट मनी' के जुड़वां अभिशापों में फंस गई है। अहम सवाल यह है कि बंगाल इस अभिशाप से कब मुक्त होगा?"