ब्रिक्स::: ब्यूरो::: ब्रिक्स बाजार में सजी दुनियाभर की विरासत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, 18 देशों के कारीगरों ने राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय और हस्तकला अकादमी में अपनी पारंपरिक कलाएं प्रदर्शित की। इस अवसर पर ईरान की कढ़ाई, बेलारूस की विलो बुनाई, और अन्य देशों की कला लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। ईरानी राष्ट्रपति की बेटी भी इस बाजार का दौरा कर चुकी हैं।

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- राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय और हस्तकला अकादमी में 18 देशों के कारीगरों ने दिखाया अपना हुनर
- बेलारूस की विलो बुनाई से लेकर ईरान की कढ़ाई तक लोगों को आकर्षित कर रही
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच दुनिया के अलग-अलग देशों की सदियों पुरानी कला और हस्तशिल्प एक ही जगह देखी जा सकती है। राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय और हस्तकला अकादमी में 15 सितंबर तक आयोजित ब्रिक्स बाजार में 18 देशों के कारीगर अपनी पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित कर रहे हैं। यहां ईरान की पारंपरिक कढ़ाई, बेलारूस की विलो बुनाई, चीन की बांस कला, रूस की सिरेमिक और लाख कला लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है。
ब्रिक्स बाजार में सांस्कृतिक विविधता
ब्रिक्स बाजार में एक ही परिसर में अलग-अलग देशों की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प दिखाई दे रहे हैं। ब्रिक्स की आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी के बीच यह बाजार सदस्य देशों की सांस्कृतिक विविधता को भी सामने ला रहा है। कारीगर न केवल अपना हुनर भारतीय दर्शकों को दिखा रहे हैं, बल्कि एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और साझा करने का अवसर भी पा रहे हैं। बाजार की खासियत यह है कि यहां सिर्फ तैयार उत्पाद ही नहीं दिखाए जा रहे, बल्कि कई कारीगर मौके पर अपनी कला बनाने की प्रक्रिया भी लोगों को समझा रहे हैं। इनमें से कई शिल्प ऐसी परंपराओं से जुड़े हैं, जिन्हें कारीगर पीढ़ियों से आगे बढ़ाते आ रहे हैं।
बेलारूस के स्टॉल पर लाना स्लास्त्सियोन विलो जैसी प्राकृतिक सामग्री से पारंपरिक बुनाई की कला दिखा रही हैं। वह मोलोदेक्नो की वर्बाचका लोक शिल्प संस्था से जुड़ी हैं और बेलारूस की पीपुल्स मास्टर के रूप में पहचानी जाती हैं। प्राकृतिक सामग्री को बुनकर उपयोगी और सजावटी वस्तुएं तैयार की जाती हैं। चीन की यांग लॉन्गमेई पारंपरिक दाओमिंग बांस बुनाई कला को पेश कर रही हैं। वह पुराने चीनी बांस शिल्प को आधुनिक डिजाइन और तकनीकों के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही हैं, जिससे यह कला नई पीढ़ी और दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सके।
ईरान की बलोची कढ़ाई
ईरान के पवेलियन में बलूची कढ़ाई की अनूठी कला को प्रदर्शित किया गया है। यह बेहद बारीक हाथ की कढ़ाई है, जिसे बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में महिलाएं पीढ़ियों से करती आ रही हैं। इसमें कपड़े पर हाथ से जटिल डिजाइन तैयार किए जाते हैं। ईरान की यह कला वहां की स्थानीय संस्कृति और महिलाओं के पारंपरिक हुनर को भी दर्शाती हैं। रूस के पवेलियन में तातियाना अलेक्सेयेवना सिवोवा, ग्जेल एसोसिएशन की मुख्य कलाकार, रूस की प्रसिद्ध सिरेमिक परंपरा को प्रदर्शित कर रही हैं। वहीं, क्यूबा के कलाकार और सुनार लुइस फारिनास लियोन धातु कला की अपनी परंपरा को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
जहरा पेजेश्कियन का दौरा
ब्रिक्स बाजार पहुंचीं ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पेजेश्कियन भी ब्रिक्स बाजार और प्रधानमंत्री संग्रहालय पहुंचीं। वह अपने पति हसन मजीदी के साथ ईरानी पवेलियन गईं। उन्होंने वहां मौजूद कारीगरों तथा प्रतिनिधियों से मुलाकात की। साथ ही ईरान की कला और हस्तशिल्प को करीब से देखा। जहरा ने भारतीय पवेलियन का भी दौरा किया। भारत में ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जहरा ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री संग्रहालय का भी दौरा किया। उन्होंने यहां भारत के प्रधानमंत्रियों की यात्राओं, योगदान और विरासत को समझा और जाना। दूतावास ने उनके दौरे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।


