आज फटेहाल जीवन जी रहे आजादी के दीवाने कमलानंद का परिवार
अनिल झा कुर्साकांटा। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में कुर्साकांटा के कमलानन्द विश्वास सहित कई युवकों ने बहादुरी दिखाई। जो और कई बार जेल गए और यातनाएं झेली। आज उनका परिवार आर्थिक अंधकार में है और कोई उनकी स्थिति जानने नहीं आता। स्वतंत्रता सेनानी को 1972 में सम्मानित किया गया था।

अनिल झा कुर्साकांटा। ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए कुर्साकांटा प्रखंड के दर्जनों युवकों ने मौत की परवाह किये बगैर स्वतंत्रता अंदोलन में कूद पड़े थे। इसके लिए लिए ये अंग्रेजी फौजों से लाठियां खाई, खून बहाया, जेल गये, यातना सही लेकिन उफ तक नहीं बोले। इन रणबाकुरों में से एक को तो बिटिश फोजों ने मार कर न केवल उनकी हड्डी तोड़ दी बल्कि पांच वर्ष नौ माह 19 दिन भागलपुर के सेंट्रल जेल में बंद कर दिया। उफ के बदले बोलते रहे भारत माता की जाय। ऐसे जाबांज थे- कुर्साकांटा प्रखंड के कमलदाहा पंचायत के बखरी निवासी कमलानन्द विश्वास। लेकिन दुखद पहलू ये कि आजादी के इस दीवाने के परिवार आज फटेहाल जीवन जीने को विवश हैं। इसके परिवार में आज विधवा पोतुहू, एक पौत्र व एक पौत्री हीं है। स्वतंत्रता सेनानी के परिजन को किसी प्रकार की लाभ की बात तो दूर न तो कोई जनप्रतिनिधि और न हीं कोई पदाधिकारी हीं हाल-चाल जानने आते हैं। कमलानन्द विश्वास फारबिसगंज में 10 वीं की पढ़ाई के दौरान मात्र 15 वर्ष के उम्र में महात्मा गांधी के 1930 के असहयोग अंदोलन में कूद पड़े थे। 1942 के अन्दोन तक वे सक्रिय रहे। देश की आजादी में सक्रिय रहने वाले इस नौजवान को ब्रिटिश फौजों ने पांच बार कारावास की सजा सुनाई थी。
जेल में ब्रिटिश सिपाही की बर्बरता के हुए शिकार
1942 के अंदोलन के दौरान हीं गौरी फोजों ने हलधरा हाट पर गिरफ्तार कर फारबिसगंज थाना लेते गया। बाद में अररिया जेल फिर भागलरपुर सेंट्रल जेल भेज दिया। कारावास के दौरान फिरांगियों ने बरर्बता का परिचय देते हुए उनकी बायें हाथ की हड्डी तोड़ दी थी। सेंट्रल जेल भागलपुर में हीं उन्होंने भारत देश के आजाद होने खुशखबरी मिली। 1947 में जेल से आजाद हुआ। वे सेंट्रल जेल में पांच वर्ष नौ माह 19 दिन गुजारे। जेल से نکلने के बाद वे जब तक जिंदा रहे कांग्रेस पार्टी व सामाजिक कार्यों में जुडे रहे।
1972 में आजादी के 25 वें वर्षगांठ पर हुए थे सम्मानित:
भारत देश के आजादी के 25 वें वर्षगांठ के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में स्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र की और से 15 अगस्त 1972 को पूर्व प्रधानामंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने ताम्र पत्र प्रदान कर सम्मानित किया । वे अब जिन्दा नहीं रहे हैं। एक पौत्र व पौत्र वधु है। उनके पौत्र आनन्द विश्वास ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जंगे आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस परिजनों को खास मौके पर भी याद नहीं किया जाता है।


