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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन कोटा घटाकर किया 13 प्रतिशत

celebrations in maharashtra after bombay hc upheld constitutional validity of reservation for marath

1 / 3Celebrations in Maharashtra after Bombay HC upheld constitutional validity of reservation for Maratha (ANI Pic)

on november 30  2018  the maharashtra legislature passed a bill granting 16 per cent reservation in

2 / 3On November 30, 2018, the Maharashtra legislature passed a bill granting 16 per cent reservation in education and government jobs for the Marathas, declared a socially and educationally backward class by the state government.(PRAFUL GANGURDE/ HT PHOTO)

mumbai  india - aug  28  2015   bombay high court     photo by bhushan koyande

3 / 3Mumbai, India - Aug. 28, 2015 : Bombay High Court : ( Photo by Bhushan Koyande )

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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की वैधता को बरकरार रखा, लेकिन इसे 16 प्रतिशत से कम कर दिया।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने प्रस्तावित 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर शिक्षा के लिए 12 प्रतिशत और नौकरियों के लिए 13 प्रतिशत करते हुए यह पाया कि अधिक कोटा 'उचित नहीं' था।

न्यायाधीश रंजीत मोरे और न्यायाधीश भारती डांगरे की खंडपीठ ने यह भी कहा कि सरकार एसईबीसी के लिए एक अलग श्रेणी बनाने और उन्हें आरक्षण देने की हकदार है।

गुरुवार का बहुप्रतीक्षित फैसला राज्य सरकार के नवंबर 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया, जिसमें एसईबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।

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महाराष्ट्र सीएम बोले- पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट कोर्ट ने किया स्वीकार

उधर, मराठा आरक्षण की संवैधानिक वैधता बरकरार रखने के कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार किया है। इसके साथ ही, खास परिस्थिति में 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को भी पार किया जा सकता है।

हालांकि, देवेन्द्र फडणवीस के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राज्य अदालत से 16 प्रतिशत कोटा पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करेगा।

याचिकाकतार्ओं में से एक के वकील विजयलक्ष्मी खोपड़े ने कहा कि अदालत ने नौ सदस्यीय एम. जी. गायकवाड़ आयोग की रिपोर्ट का भी समर्थन किया, जिसमें मराठों को 'सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग' के रूप में वगीर्कृत करने की बात कही गई थी।

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खोपड़े ने आईएएनएस से कहा कि न्यायाधीश ने कहा कि सरकार द्वारा दिया गया आरक्षण पिछड़े वर्ग आयोग द्वारा प्रस्तुत न्यायोचित आंकड़ों पर आधारित है। 

राज्य सरकार की तरफ से मराठा को सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ा घोषित करने के बाद 30 नवंबर 2018 को महाराष्ट्र विधानसभा ने एक बिल पास करते हुए नौकरियों और शिक्षा में मराठा को 16 फीसदी आरक्षण दिए जाने का रास्ता साफ किया था।

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  • Web Title:Bombay High Court upholds Maharashtra Maratha quota but reduces it to 12- 13 percent