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शोले फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी को हाई कोर्ट से झटका, खारिज की याचिका; जानें पूरा मामला

मशहूर फिल्म शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है। संपत्ति विवाद में फंसे सिप्पी की अंतरिम याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है।

शोले फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी को हाई कोर्ट से झटका, खारिज की याचिका; जानें पूरा मामला
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईTue, 16 Apr 2024 12:57 PM
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मशहूर फिल्म शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तगड़ा झटका दिया है। संपत्ति विवाद में फंसे सिप्पी की अंतरिम याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। उनकी ओर से याचिका में मांग की गई थी कि दक्षिण मुंबई में एक फ्लैट पर उन्हें कोर्ट रिसीवर, सिप्पी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के 500 शेयर और प्रोडक्शन हाउस की 27 फिल्मों के अधिकार दिए जाएं।  रमेश सिप्पी के मुताबिक, उनके पिता जीपी सिप्पी की संपत्ति पर वह अपने भाई-बहनों के साथ बराबर के हिस्सेदार हैं। 

मामले में सुनवाई न्यायमूर्ति मनीष पितले की पीठ ने की। फिल्म निर्माता की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, "आवेदन बिना किसी योग्यता के पाया गया और इसलिए इसे खारिज कर दिया जाता है।"

मामला क्या है?
अपनी याचिका में, रमेश सिप्पी ने दावा किया कि दिसंबर 2007 में उनके पिता जीपी सिप्पी और जून 2010 में उनकी मां मोहिनी सिप्पी की मृत्यु के बाद वह अपने चार भाई-बहनों के साथ उनकी संपत्ति में बराबर के हकदार हैं।  उन्होंने कहा कि उनके पिता ने एक वसीयत बनाई और अपनी पूरी संपत्ति मेरी मां को दे दी, बाद में, उन्होंने भी एक वसीयत बनाई और संपत्ति भाई सुरेश को दे दी।

रमेश सिप्पी ने दावा किया कि चूंकि सुरेश ने दिसंबर 2016 में मां की वसीयत के माध्यम से उन्हें मिले सभी अधिकारों को त्यागने का एक हलफनामा दायर किया था, इसलिए संपत्तियों को हम भाई-बहनों के बीच समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए। हालांकि, न्यायमूर्ति पितले ने कहा कि रमेश सिप्पी की याचिका में मोहिनी सिप्पी द्वारा सुरेश को सौंपे गए हस्तांतरित वसीयत में उनका दावा प्रथम दृष्टया कमजोर लगता है।

पीठ ने कहा कि रमेश सिप्पी द्वारा दिए गए कई दावे "पुष्टि नहीं करते हैं और ऐसा लगता है कि वे तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।" पीठ ने मामले में सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि सिप्पी परिवार में वर्षों से मुकदमेबाजी चल रही है और रमेश सिप्पी द्वारा दायर नई याचिका की बातें पिछली कार्यवाही के दौरान किए गए दावों से काफी अलग हैं।