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आंख बंद करके आदेश नहीं दे सकते; ऐसा क्या हुआ जो आरोपी की मां से बोला हाई कोर्ट, पुलिस कस्टडी में मौत का केस

सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग केस में गिरफ्तार एक आरोपी की पुलिस कस्टडी में मौत का मामला हाई कोर्ट में है। आरोपी की मां की मांग पर अदालत ने कहा- आंखें बंद करके आदेश नहीं दे सकते।

आंख बंद करके आदेश नहीं दे सकते; ऐसा क्या हुआ जो आरोपी की मां से बोला हाई कोर्ट, पुलिस कस्टडी में मौत का केस
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईThu, 16 May 2024 12:05 PM
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बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के घर के पास फायरिंग मामले में पुलिस पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से एक ने पुलिस हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। आरोपी की मां ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर उसके बेटे की मौत को हत्या बताकर सीबीआई जांच कराने की मांग की है। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस से मामले में स्टेटस रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई 22 मई तय की है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की। आरोपी की मां की मांग पर हाई कोर्ट ने कहा कि उन्हें अपना काम करने दीजिए, जांच चल रही है और फिर हम देखने के लिए हैं ही। सीबीआई जांच का आदेश आंखें बंद करके नहीं दे सकते। 

एक मई को सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस ने अनुज थापन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद थापन ने पुलिस हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गले पर फंदा लगा लिया। उसे अस्पताल लाया गया लेकिन, तब तक उसकी जान जा चुकी थी। बाद में पुलिस ने बयान दिया कि अनुज थापन ने पुलिस हिरासत के दौरान खुदकुशी की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आत्महत्या की बात सामने आई। हालांकि पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। उधर, थापन की मां ने इंसाफ के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है।

बार एंड बेंच में छपि रिपोर्ट के मुताबिक, थापन की मां रीता देवी ने  हाई कोर्ट में अपील दायर की है। बुधवार को इस मामले में न्यायमूर्ति संदीप मार्ने और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने सुनवाई की और राज्य सरकार और पुलिस से जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रीता देवी से कहा कि वह "आँख बंद करके" जांच को सीबीआई के हवाले करने का आदेश नहीं दे सकते। पीठ ने कहा, "हम आंख मूंदकर किसी तीसरे पक्ष को जांच देने का आदेश नहीं दे सकते। उन्हें अपना काम करने दीजिए। जांच चल रही है और फिर हम देखेंगे।"

हाई कोर्ट की टिप्पणी

पीठ थापन की मां रीता देवी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने दावा किया है कि उनके बेटे की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी और पुलिस ने उस पर बेरहमी से हमला किया और प्रताड़ित किया था। वकील श्रीराम परक्कट और राजवंत कौर के माध्यम से दायर याचिका में थापन की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। इसमें थापन के शव के नए सिरे से पोस्टमार्टम के लिए निर्देश भी मांग की गई है।

पुलिस की तरफ से दलील

सरकारी वकील प्राजक्ता शिंदे ने बुधवार को दलील दी कि एक आकस्मिक मौत रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की गई थी और मामले की जांच राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा की जा रही है। शिंदे ने अदालत को यह भी बताया कि चूंकि थापन की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी, इसलिए मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू कर दी गई है। पीठ ने शिंदे को सीआईडी ​​जांच और मजिस्ट्रेट जांच में प्रगति के बारे में एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित पुलिस स्टेशन को पुलिस अधिकारियों के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) को संरक्षित करने का भी निर्देश दिया है।