प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर का प्रभार बोधगया मठ ने संभाला
धार्मिक न्यास पर्षद के आदेश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ प्रभार हस्तांतरण

बोधगया स्थित प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर का प्रभार रविवार को बोधगया मठ को सौंप दिया गया। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के आदेश के आलोक में बोधगया मठ ने मंदिर का प्रभार प्रशासनिक अधिकारियों के मौजूदगी में प्रभार सांभला। धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से जारी आदेश के अनुसार गठित 11 सदस्यीय न्यास समिति का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद पर्षद ने मंदिर को बोधगया मठ का अभिन्न अंग मानते हुए इसकी परिसंपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी बोधगया मठ को सौंपने का निर्णय लिया।
जगन्नाथ मंदिर का इतिहास
जगन्नाथ मंदिर के सचिव राय मदन किशोर ने बताया कि मंदिर शुरू से ही बोधगया मठ की धार्मिक परंपरा और व्यवस्था का हिस्सा रहा है। मंदिर के जर्जर होने के बाद जीर्णोद्धार के लिए श्री जगन्नाथ जीर्णोद्धार समिति का गठन किया गया था। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मंदिर की व्यवस्था के लिए धार्मिक न्यास पर्षद ने पांच वर्षों के लिए न्यास समिति गठित की थी। अब समिति का कार्यकाल पूरा होने पर पर्षद के आदेश के तहत मंदिर की व्यवस्था मठ को सौंप दी गई है।
मंदिर के विकास में योगदान
बोधगया मठ की ओर से स्वामी विवेकानंद गिरि ने मंदिर के विकास में डालमिया परिवार के योगदान को याद करते हुए आभार जताया। उन्होंने मंदिर के कर्मचारियों के योगदान की भी सराहना की और भविष्य में सहयोग जारी रखने की अपील की।
मठ के महंत का बयान
मठ के महंत त्रिवेणी गिरि ने धार्मिक न्यास बोर्ड की निर्णय का स्वागत किया। इस मौके पर स्वामी सत्यानंद गिरि, स्वामी कार्तिक्यानंद गिरि समेत जय सिंह, रणविजय सिंह, शंकर यादव, संजय सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, विजय मांझी, सुधांशु मिश्रा, संजय यादव और लल्लू गुप्ता, अरबिंद सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।


