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देशइन तरीकों से कोरोना के खिलाफ जंग जीत रही BMC, पढ़ें क्या मुंबई मॉडल

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Mrinal Sinha
Tue, 11 May 2021 03:49 PM
इन तरीकों से कोरोना के खिलाफ जंग जीत रही BMC, पढ़ें क्या मुंबई मॉडल

भारत में कोरोना के आंकड़े कम जरूर हुए हैं लेकिन अभी तक हर दिन तीन लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। इन नए मामलों में अब तक एक बड़ी हिस्सेदारी देश की आर्थिक राजधानी मुुंबई की भी होती थी लेकिन बीते कुछ दिनों से रोजाना आने वाले मामले कम हो रहे हैं और सोमवार को यह 2 हजार से भी नीचे पहुंच गए। अधिक जनसंख्या और घनी आबादी वाले मुंबई को भी दूसरी लहर में अन्य राज्यों की तरह बेड और ऑक्सीजन दोनों की कमी का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद, कम से कम 1.23 करोड़ की आबादी वाले मुंबई में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में तेजी से कमी दिख रही है।

मुंबई में बीएमसी ने महामारी से निपटने की जो रणनीति अपनाई उसकी सुप्रीम कोर्ट ने खूब तारीफ की है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बीते बुधवार को कोरोना मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली के ऑक्सीजन संकट पर सुझाव दिया कि यहां भी वैज्ञानिक तरीके से इसका वितरण हो। दिल्ली को 'मुंबई मॉडल' से सीखना चाहिए।  बता दें मुंबई में 4 अप्रैल को 11,776 मरीज मिले थे, यह संख्या 10 मई को घटकर 2 हजार से नीचे आ गई है। जब देश में दूसरी कोरोना लहर के पीक की बात हो रही है वहीं मुंबई में इस पर तेजी से काबू पाया जा रहा है। बीएमसी के कमिश्नर सुरेश काकानी ने दूसरी कोरोना लहर के खतरे को भांपते हुए शहर में व्यापक तैयारियां काफी पहले ही शुरू करा दी थीं। जानें मुंबई की वे पांच कदम, जिससे वहां कोरोना अब बेदम हो रहा है...

जानें क्या है कोरोना से जंग का 'मुंबई मॉडल'

अतिरिक्त नगर आयुक्त सुरेश काकानी ने बताया कि “मुंबई मॉडल डिसेंट्रलाइजेशन, बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, और उन्हें प्लग करने के लिए खामियों पर कड़ी नजर रखने का एक कॉम्बिनेशन है। उदाहरण के लिए, हमें कोरोना की पहली लहर के दौरान कोविड -19 रोगियों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट के महत्व का एहसास हुआ। इसके बाद, हमने सिलेंडर-आधारित मॉडल पर भरोसा करने के बजाय, लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) टैंकों के साथ अपनी सुविधाओं को अपग्रेड कर लिया। जब दूसरी लहर आई, तब तक सिलेंडर पर हमारी निर्भरता काफी कम हो गई थी। ”

24/7 चलने वाले वॉर रूम
8 मई 2020 को जब इकबाल चहल ने बीएमसी के कमिश्नर का पद संभाला तो उन्होंने पहला फैसला यह लिया कि डिजास्टर कंट्रोल रूम को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया। इन्हें 24 कोविड रिस्पॉन्स वॉर रूम में बांटा गया और सभी एक महीने के अंदर संचालित होने लगे और सबकी अपनी अलग हेल्पलाइन नंबर भी थी। डॉक्टर, मेडिकल इंटर्न, स्कूल टीचर और सोशल वर्कर इन हेल्पलाइनों को 24 घंटे सातों दिन चलाते हैं। ये सब आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं। इससे फायदा यह हुआ कि जब केस पीक पर पहुंचने लगे तो बीएमसी मरीजों के संपर्क में रही और अफरा-तफरी का माहौल नहीं बना। 

शुरू किया जंबो सिलिंडरों का उपयोग

काकानी ने बताया कि पहले सभी अस्पताल छोटे सिलिंडरों पर निर्भर थे। इनकी जगह जंबो सिलिंडरों का उपयोग शुरू किया गया। जंबो सिलिंडरों में 10 गुना ज्यादा गैस होती है। इसके साथ ही 13 हजार किलो लीटर वाले ऑक्सीजन टैंक तैयार किए। अस्पताल को सिलिंडरों से सप्लाई की बजाए स्टोरेज टैंक से सप्लाई करने के लिए तैयार किया गया। 

सैंपल के लिए लगाए कियोस्क

बीएमसी ने मुंबई में शॉपिंग मॉल्स से लेकर सब्जी मंडियों, मछली बाजार जैसे अन्य सभी भीड़ वाले स्थानों पर मरीजों की टेस्टिंग के लिए कियोस्क लगाए। यहां आने वालों के स्वाब नमूने लिए गए और मात्र 15-20 मिनट में ही रैपिड एंटीजन टेस्ट करने के बाद संबंधित व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे तत्काल आइसोलेट किया गया।
 

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