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अंधा कानून : गुनाह किया रामानंद ने, 22 साल से सजा भुगत रहा राजेंद्र

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चोरी के आरोप में पकड़े गए शातिर ने पुलिस को दूसरे का नाम पता बता दिया जिसे वेरीफाई कराए बिना ही पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। जमानत पर छूटकर वह तो गायब हो गया। तारीखों पर न पहुंचने पर कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट आया तो पुलिस ने निर्दोष को जेल भेज दिया। वह भी जमानत पर छूटा।

22 साल से यह व्यक्ति अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। इस बीच, पुलिसिया लिखापढ़ी के फेर में फंसे व्यक्ति की जमानत के बाद अब फिर से कोर्ट से गिरफ्तारी का फरमान आया है। पुलिस ने उसे पकड़ लिया और जेल भेजने की तैयारी कर रही है। उधर, असली गुनहगार की दो साल पहले मौत भी हो चुकी है।

कोतवाली पुलिस ने 5 जुलाई 1996 को रोडवेज बस स्टैंड से एक बस यात्री की अटैची चोरी के मामले में एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ा था। पुलिस ने नाम पता पूछा तो उसने अपनी पहचान छुपाते हुए गलत नाम पता दर्ज करा दिया जो कि फरीदपुर के गांव ततारपुर निवासी राजेंद्र का था। जबकि आरोपी का असली नाम रामानंद था जो फतेहगंज पूर्वी के हेमूपुरा निवासी था। 

पुलिस ने आरोपी के नाम का बगैर वेरीफिकेशन किए उसे राजेंद्र नाम से जेल भेज दिया। जमानत मिलने के बाद रामानंद गायब हो गया। कोर्ट में तारीखें पड़ती रहीं और राजेंद्र बना रामानंद हाजिर नहीं हुआ तो छह साल पहले गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ। पुलिस ने असली राजेंद्र को पकड़कर जेल भेज दिया। 

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राजेन्द्र के वकील महेश यादव ने कहा-"मेरी 33 वर्षों की प्रैक्टिस में ऐसा पहली बार मामला आया है। मैंने राजेंद्र के र्निदोष होने के साक्ष्य कोर्ट में दाखिल कर दिए थे। जमानत कराने वालों से असली आरोपी का खुलासा हो चुका है। उसने धोखाधड़ी करके कोतवाली पुलिस को राजेंद्र का नाम दर्ज कराया था।"

राजेंद्र के भाई रामपाल ने बताया कि पुलिस की ओर से लिखा गया हुलिया भी राजेंद्र से मिलान खाता हुआ नहीं पाया गया। इसीलिए कोर्ट ने तीन महीने बाद राजेंद्र को जमानत पर छोड़ दिया। हालांकि असली आरोपी रामानंद की दो साल पहले मौत हो चुकी है।

जेल जाने के बाद राजेंद्र के परिजनों ने वकील से जानकारी जुटानी शुरू की। वकील ने कोर्ट में आरोपी की जमानत कराने वाले लोगों के नाम लेकर असली आरोपी का पता लगाने की मुहिम शुरू की। जानकारी मिली कि हेमूपुरा के रामानंद ने कोतवाली पुलिस को चकमा देकर राजेंद्र का नाम दर्ज करा दिया। वकील ने राजेंद्र के निर्दोष होने के कोर्ट में साक्ष्य दिए। तीन महीने बंद रहने के बाद राजेंद्र को जमानत पर छोड़ दिया गया। 

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  • Web Title:Blind Law crime by Ramanand while punishment to Rajendra for 22 years