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7 अप्रैल, 2021|11:51|IST

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सरकार किसान आंदोलन के साथ ना करे शाहीन बाग जैसा बर्ताव, जरूरत पड़ी तो 2023 तक चलेगा आंदोलन: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को कहा कि भारत सरकार को दिल्ली के तमाम बॉर्डरों पर चल रहे किसान आंदोलन के साथ बीते साल दिल्ली में हुए शाहीन बाग के आंदोलन जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। किसान नेता ने दावा किया कि नए कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद ही प्रदर्शनकारी घर जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी सभी किसान कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो 2023 तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

आपको बता दें कि पिछले साल शाहीन बाग सीएए विरोधी प्रदर्शन के केंद्र के रूप में उभरा था, जो कि दिसंबर 2019 में शुरू हुआ था और इसमें महीनों तक लोगों ने हिस्सा भी लिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 24 मार्च, 2020 को इस विरोध स्थल को खाली करा लिया था, क्योंकि कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए एक दिन पहले ही देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया था।

बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र के कृषि कानून किसानों के लिए नुकसान का सबब बनेंगे।

उन्होंने कहा, "जब तक इन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तब तक किसान घर वापस नहीं जाएंगे। सरकार कोरोन वायरस की बात करती है लेकिन हमने सरकार से कहा है कि वे इस आंदोलन के साथ शाहीन बाग की तरह व्यवहार न करें। यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। हम कोरोनो वायरस दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे और यह आंदोलन जारी रखेंगे और तब तक जारी रखेंगे जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती।"

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "भले ही हमें 2023 तक विरोध जारी रखना पड़े, हम इसके लिए भी तैयार हैं। जब तक इन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता और एमएसपी पर कानून नहीं बनाया जाता, तब तक किसान घर वापस नहीं जाएंगे।"

टिकैत ने दोहराया कि किसान सरकार से बात करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "जब भी सरकार के पास समय होता है, हम बात करने के लिए तैयार होते हैं। हम उनके कॉल का इंतजार करेंगे।"

पिछले साल सितंबर में केंद्र द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर हजारों किसान, ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से, दिल्ली के तीन सीमाओं सिंघू, टिकरी और गाजीपुर में डेरा डाले हुए हैं।

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  • Web Title:BKU leader Rakesh Tikait said- Government should not treat farmers stir like Shaheen Bagh protest