बंगाल सरकार आज पेश कर सकती है यूसीसी विधेयक
भाजपा सरकार सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर सकती है। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म से परे समान नागरिक प्रारूप बनाना है। यह विधेयक बहस का मुख्य विषय रहेगा और भाजपा के लिए यह चुनावी वादे को पूरा करने वाला कदम है।

भाजपा सरकार सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर सकती है। तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को समाप्त करने के दो महीने से भी कम समय में भाजपा सरकार यह विधेयक लाने जा रही है। इससे चुनाव के बाद की पहली बड़ी वैचारिक बहस के शुरू होने की संभावना है। इस प्रस्तावित कानून का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से परे एक समान नागरिक प्रारूप बनाना है। उम्मीद की जा रही है कि यह विधेयक मौजूदा बजट सत्र में चर्चा का मुख्य विषय रहेगा और पहचान, समानता, धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक अधिकारों और पर्सनल लॉ और राज्य के अधिकार के बीच संबंधों पर व्यापक बहस का आधार बनेगा। भाजपा के लिए यह विधेयक उसके मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने और इस लंबे समय से चली आ रही बात को दोहराने जैसा है कि सभी नागरिकों पर एक जैसे नागरिक कानून लागू होने चाहिए। वहीं, विपक्ष के लिए यह सामाजिक सहमति, संवैधानिक सुरक्षा और इस बात पर सवाल उठाता है कि क्या अलग-अलग समुदायों पर असर डालने वाले सुधार को बिना व्यापक बातचीत के लागू किया जा सकता है। मालूम हो कि शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया था कि सरकार मौजूदा सत्र में इस कानून को आगे बढ़ाने का इरादा रखती है। इससे पहले बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि भाजपा सरकार सत्ता में आने के छह महीने के भीतर राज्य में यूसीसी लागू करेगी。
तृणमूल की दोहरी चुनौती
भाजपा सरकार का प्रस्तावित यूसीसी विधेयक बंगाल विधानसभा में एक अनोखी राजनीतिक लड़ाई शुरू करने वाला है। यह लड़ाई न सिर्फ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच होगी, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के दो विरोधी गुटों के बीच भी होगी। ये दोनों गुट इस कानून के खिलाफ मुख्य आवाज बनने की होड़ में हैं। इन गुटों का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। पार्टी पर नियंत्रण को लेकर इनके बीच महीने भर से चल रही खींचतान के अब विधानसभा में भी सामने आने की उम्मीद है। दोनों गुटों ने हालांकि विधेयक के विरोध के संकेत दिए हैं, लेकिन सूत्रों ने बताया कि वे अलग-अलग रणनीतियां बना रहे हैं और अलग-अलग वक्ताओं एवं राजनीतिक विमर्श का इस्तेमाल कर रहे हैं।


