DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आलोक वर्मा मामले पर भाजपा ने मल्लिकार्जुन खड़गे को निशाने पर लिया

मल्लिकार्जुन खड़गे

भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद पर नियुक्ति और फिर उन्हें पद से हटाने- दोनों ही मौकों पर असहमति जताने को लेकर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की तीखी आलोचना की है।

रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ‘वास्तव में, श्री मल्लिकार्जुन खड़गे अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी हैं। जब चयन समिति ने श्री आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख नियुक्त किया तो उन्होंने असहमति जताई। अब, जब श्री वर्मा को उसी चयन समिति ने हटा दिया है, तो उन्होंने उस पर भी असहमति जताई है।’

भाजपा के एक अन्य नेता एवं केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भी दोनों ही मौकों पर खड़गे की ओर से असहमति जताने के लिए उनकी तीखी निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘श्री वर्मा की सीबीआई प्रमुख के तौर पर नियुक्ति और हटाए जाने- दोनों ही परिस्थितयों में विरोध से साबित होता है कि कांग्रेस दिमाग का इस्तेमाल किए बिना किसी भी चीज का विरोध करती है। कुछ समय तो अपनी ही विश्वसनीयता की कीमत पर।’  

गौरतलब है कि खड़गे ने 20 जनवरी 2017 को वर्मा की सीबीआई के महानिदेशक के पद पर नियुक्ति का यह कहते हुए विरोध किया था कि उन्हें जांच एजेंसी में काम का अनुभव नहीं है। उन्होंने सरकार से दूसरे अधिकारी रूपक कुमार दत्ता के नाम पर विचार करने का अनुरोध किया था जो उस समय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव थे। अब वह वर्मा को इस पद से हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

तोता उड़ जाता तो सारे राज खोल देता : सिब्बल

आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा कि ‘पिजड़े में बंद तोते’ को उड़ने नहीं दिया गया क्योंकि वह सत्ता के गलियारे के सारे राज खोल देता। सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, ‘आलोक वर्मा को हटाया गया। समिति ने सुनिश्चित किया कि पिजड़े में बंद तोता उड़ न सके, क्योंकि इसका डर था कि कहीं ये तोता सत्ता के गलियारे के राज नहीं खोल दे।’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘पिजड़े में बंद तोता अभी बंद ही रहेगा’। कुछ साल पहले उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को ‘पिजड़े में बंद तोता’ कहा था।

सीबीआई पर सरकारी नियंत्रण की साजिश : माकपा

माकपा ने सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाने के मोदी सरकार के फैसले को इस जांच एजेंसी पर सरकारी नियंत्रण कायम करने का साजिश करार दिया है। माकपा पोलित ब्यूरो द्वारा शुक्रवार को जारी बयान में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाली के 48 घंटे के भीतर उन्हें पद से हटाने के मोदी सरकार के फैसले को सीबीआई पर सरकार का नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए किया गया बताया है। इससे सरकार अपने राजनीतिक और चुनावी एजेंडे को पूरा करने में सीबीआई का औजार के रूप में इस्तेमाल कर सके। पार्टी ने सरकार पर सीबीआई की स्वायत्तता से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने के लिए लगातार हमले कर रही है। 

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने प्रकाशित किया था राम रहीम का घिनौना सच

CBI चीफ के पद से हटाए जाने के 1 दिन बाद वर्मा ने नौकरी से दिया इस्तीफा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:BJP targets Mallikarjun Kharge on Alok Verma case