आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा अपना सकती है नई रणनीति
भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों में भावी मुख्यमंत्री की घोषणा करने की बजाय सामूहिक नेतृत्व के तहत चुनाव लड़ेगी। इस नई रणनीति का उद्देश्य सत्ता विरोधी माहौल को रोकना और सफलतम परिणाम प्राप्त करना है। पार्टी की प्राथमिकता अपनी सरकार को बरकरार रखना और अन्य राज्यों में भी जीत हासिल करना है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भाजपा नेतृत्व आने वाले विधानसभा चुनावों में नई रणनीति को अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसमें भावी मुख्यमंत्री घोषित करने के बजाए सामूहिक व वर्तमान नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ा जाएगा। पिछले कई चुनावों के ट्रेंड को देखते हुए पार्टी का मानना है कि इससे सफलता का प्रतिशत बढ़ता है और ज्यादा लाभ मिलता है। जिस राज्य में पार्टी की सरकार है, उसके नेता को आगे भी बरकरार रखा जा सकता है, लेकिन वही फिर से नेता बनेगा, इसकी सीधी घोषणा करने से बचा जाएगा। भाजपा में नए नेतृत्व के साथ नए बदलाव व नई रणनीति पर भी काफी चिंतन हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी का मानना है कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें हैं वहां चुनाव के दौरान ही अगले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से सत्ता विरोधी माहौल बढ़ जाता है और पार्टी में भी दो तरह की धाराएं बन जाती है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो पार्टी पूरी ताकत लगाती है और विरोधियों को भी मौका नहीं मिल पाता है।
भाजपा की नई सोच
सूत्रों के कहना कि पार्टी में एक बड़े वर्ग का मानना है कि जहां पर उसके वर्तमान में मुख्यमंत्री है, चुनाव तो उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और उनको आगे भी बरकरार रखा जा सकता है, लेकिन इसकी पहले से ही घोषणा नहीं की जानी चाहिए। जहां पार्टी सत्ता में नहीं है, वहां पर भी सामूहिक नेतृत्व में ही जाने से ज्यादा सफलता की संभावना रहती है। दरअसल पार्टी में यह सोच 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद हुए विभिन्न विधानसभाओं के चुनावों के नतीजों को देखते हुए सामने आई है, जिसमें उसने कुछ जगह उस समय के मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और कुछ में विपक्ष में रहते हुए। किसी भी जगह पहले से भावी मुख्यमंत्री घोषित न करने से उसे काफी ज्यादा सफलता मिली। अब पार्टी इसे आगे से सभी विधानसभा चुनावों में प्रभावी रूप से अमल में लाना चाहती है।
आगामी विधानसभा चुनाव
अगले साल सात विधानसभाओं के चुनाव है, जिनमें फरवरी-मार्च में पांच व दिसंबर में दो विधानसभाओं के चुनाव होंगे। भाजपा की इनमें पंजाब व हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, गुजरात में सरकारें हैं। पार्टी की कोशिश है कि वह अपनी सत्ता वाले राज्यों में सरकार को बरकरार रखे और बाकी दो प्रदेशों में भी जीत हासिल करे। ऐसे में उसे अपनी इस नई रणनीति से पहले से भी ज्यादा सफलता मिलने की संभावना दिख रही है।


