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भाजपा के भावी मिशन में बेहद अहम है तमिलनाडु, रजनीकांत पर टिकी निगाह

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भाजपा दक्षिण भारत के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु के दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी मजबूत जगह बनाने की कोशिश करेगी। पार्टी राज्य में नया, युवा और प्रभावी नेतृत्व उभारने की कोशिश कर रही है। राज्य में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन को लेकर भी भाजपा का रुख अभी साफ नहीं है। पार्टी फैसला लेने के पहले अन्नाद्रमुक के विभिन्न धड़ों की एकजुटता का इंतजार करेगी। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा दक्षिण भारत में ही सबसे कमजोर रही है और उसका इस राज्य में खाता भी नहीं खुला।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अन्नाद्रमुक राजग की घटक है और लोकसभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव की रणनीति अभी बननी बाकी है। अगर अन्नाद्रमुक एकजुट होकर लड़ती है तो उसका फायदा होगा। इस बीच भाजपा अपनी ताकत बढ़ाने की भी कोशिश करेगी। पार्टी राज्य में युवा और प्रभावी नेता को उभारने की कोशिश कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष तमिल साई के साथ पार्टी रामनाथपुरम से लोकसभा चुनाव लड़े प्रदेश उपाध्यक्ष नयनार नागेंद्रन को भी आगे बढ़ा रही है। नयनार अन्नाद्रमुक से आए हैं और दो बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद उनको 32 फीसद से ज्यादा वोट मिले थे।

जयललिता और करुणानिधि के बिना पहला चुनाव

गौरतलब है कि तमिलनाडु में 2021 के विधानसभा चुनाव एकदम नई परिस्थितियों में होंगे। राज्य के दोनों प्रभावी दल अन्नाद्रमुक व द्रमुक अपने चमत्कारी नेताओं जयललिता और करुणानिधि के बिना चुनाव में उतरेंगे। द्रमुक को लोकसभा चुनावों में खासी सफलता मिली, लेकिन उसके नेता स्टालिन की असली परीक्षा 2021 में ही होगी। दूसरी तरफ अन्नाद्रमुक सत्ता में होने के बावजूद विभिन्न धड़ों में बंटी होने से कमजोर है। सत्तारूढ़ धड़ा व दिनकरण के नेतृत्व वाला गुट अगर एक साथ आते हैं तो वह मजबूत होकर उभर सकती है।

रजनीकांत पर टिकी निगाह

भाजपा की नजर राज्य की राजनीति में पदार्पण करने वाले फिल्मी सितारों पर भी है। रजनीकांत के चुनावी मैदान में उतरने या न उतरने और कमल हासन की भावी राजनीतिक भूमिका पर भी भाजपा नजर रखे है। अगर रजनीकांत चुनावी राजनीति में आते हैं तो उसका असर भी पड़ेगा, लेकिन कितना इसका आकलन अभी लगाना मुश्किल है। गौरतलब है कि भाजपा ने हाल में सदस्यता अभियान में तमिलनाडु में 20 लाख से ज्यादा नए सदस्य बनाए हैं जो एक बड़ी सफलता है। 2015 में भाजपा के राज्य में 46 लाख सदस्य थे। पार्टी का मानना है कि उसके प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ रहा है। 

संगठन में दक्षिण के प्रभावी नेता

दरअसल भाजपा संगठन में तीन महासचिव दक्षिण भारत से हैं, इनमें महासचिव संगठन बीएल संतोष भी शामिल हैं। खास बात यह है कि तीनों ही संघ में प्रचारक रह चुकें हैं, ऐसे में उनकी संगठन क्षमता भी काफी है। मुरलीधर राव तो दक्षिण भारत को पहले से ही देख रहे हैं। राम माधव भी वहां पर प्रभावी हैं। ऐसे में भाजपा दक्षिण में अपनी कमजोर पकड़ वाले चार राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में खुद को मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनने के बाद उसका लाभ भी भाजपा को मिलेगा। 
 

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  • Web Title:BJP next big target is Tamil Nadu assembly elections 2021 party keeps eye on south super star Rajinikanth