भाजपा गैर-पदाधिकारियों को भी बना सकती है राज्यों का संगठन प्रभारी
भाजपा नेतृत्व राज्यों के संगठन प्रभारियों की नियुक्ति में कुछ प्रमुख नेताओं को शामिल कर सकता है। यह नियुक्तियां संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर होंगी। भाजपा ने तीन राज्यों के लिए नियुक्तियां की हैं और बाकी राज्यों के लिए जल्द ही प्रभारियों का चयन होगा।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। भाजपा नेतृत्व राज्यों के संगठन प्रभारियों की नियुक्ति में कुछ गैर-पदाधिकारी प्रमुख नेताओं को भी शामिल कर सकता है। संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक परिस्थितियों में प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता इन नियुक्तियों का प्रमुख आधार होगी। भाजपा में अभी केवल तीन राज्यों के लिए ही नियुक्तियां की गई हैं और तीस से ज्यादा संगठनात्मक राज्यों के लिए प्रभारियों की नियुक्तियां होनी बाकी है। प्रभारी के साथ कई राज्यों में सह प्रभारी भी नियुक्त किए जाएंगे। आम तौर पर संगठन प्रभारी पार्टी पदाधिकारी होते हैं, जिनमें महासिचव, उपाध्यक्ष व सचिव शामिल होते हैं। लेकिन कई बार कार्यकारिणी सदस्यों को भी प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस बार भी कुछ राज्यों में कार्यकारिणी सदस्य बनने वाले पार्टी के कुछ वरिष्ठ व अनुभवी नेताओं को प्रभारी नियुक्त किया जा सकता है। दरअसल संगठन के विस्तार व केंद्रीय नेतृत्व में युवा नेतृत्व को ज्यादा जगह देने के चलते संगठन की मजबूती के लिए वरिष्ठ नेताओं को इस भूमिका से जोड़ा जा सकता है।
नियुक्तियों की अहमियत
गौरतलब है कि संगठन के विस्तार और पार्टी की जरूरतों के लिहाज से यह नियुक्तियां अहम होती हैं, जो केंद्रीय राज्यों के नेतत्व के बीच सेतु का काम करती है। इसके अलावा राज्यों में सरकार व संगठन के समन्वय में भी प्रभारियों की अहम भूमिका रहती है। पार्टी नेतृत्व को अभी कार्यकारिणी का गठन करना है। भाजपा संविधान के अनुसार कम से कम 25 फीसद नए सदस्य कार्यकारिणी में शामिल किए जाते हैं। ऐसे में कई नए सदस्यों को मौका मिलना तय है। नए संगठन में केंद्रीय संगठनात्मक भूमिकाओं से बाहर रहे नेता भी कार्यकारिणी में शामिल किए जा सकते हैं।
कार्यकारिणी का गठन
संकेत हैं कि पार्टी नेतृत्व इस माह के आखिर तक नई कार्यकारिणी के साथ केंद्रीय संसदीय बोर्ड व केंद्रीय चुनाव समिति की भी घोषणा कर देगा। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर मंथन जारी है। चूंकि संगठन को नया रूप दिया जा रहा है, जिसमें युवाओं व महिलाओं को ज्यादा जगह दी जानी है, इसलिए गठन में देर हो रही है।


