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आंध्र प्रदेश में क्या है भाजपा का B-J-P फॉर्मूला, जगन और चंद्रबाबू में कौन बैठेगा फिट

आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा विभिन्न प्रदेशों में अपनी स्थिति मजबूत बनाने में जुटी है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश का नाम भी शामिल है। आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मौजूदगी नहीं है।

आंध्र प्रदेश में क्या है भाजपा का B-J-P फॉर्मूला, जगन और चंद्रबाबू में कौन बैठेगा फिट
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 09 Feb 2024 05:47 PM
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आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा विभिन्न प्रदेशों में अपनी स्थिति मजबूत बनाने में जुटी है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश का नाम भी शामिल है। आंध्र प्रदेश में भाजपा की मौजूदगी नहीं है। ऐसे में वह यहां के क्षेत्रीय दिग्गजों, चंद्रबाबू नायडू, जगनमोहन रेड्डी और पवन कल्याण के दम पर सियासी बढ़त बनाना चाहती है। दावा किया जा रहा है कि यहां पर भाजपा, बी (चंद्रबाबू नायडू) , जे (जगनमोहन रेड्डी) और पी (पवन कल्याण) (बी-जे-पी) फॉर्मूला आजमा रही है। यहां पर चुनाव में जो भी जीतेगा, भाजपा उसके साथ ही जाएगी यह भी तय है। फिलहाल नायडू और रेड्डी, दोनों ने दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की। लेकिन बात उतनी आसानी से बनती नजर नहीं आ रही, जितनी दिख रही है।

दिल्ली में मुलाकात
दिल्ली में पहले तो तेलुगुदेशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसके करीब 24 घंटे के अंदर ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी भी दिल्ली पहुंच गए और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बताया यह जा रहा है कि जगन रेड्डी ने पीएम मोदी से अपने प्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग को लेकर भेंट की थी। वहीं, टीडीपी मुखिया के मुलाकात केंद्रीय फंड्स और अन्य मुद्दों पर था। लेकिन इन मुलाकातों में कहीं न कहीं, आगामी लोकसभा चुनाव का असर भी है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा किसी भी पक्ष में फैसला करने से पहले सबकुछ देखना परखना चाहेगी। 

भाजपा की मुश्किल क्या
असल में आंध्र प्रदेश में भाजपा कोई बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं है। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में उसने सभी 173 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। प्रदेश में उसके पुराने रिकॉर्ड और हाल में पड़ोसी राज्य तेलंगाना में खराब प्रदर्शन के चलते वह किसी भी दल से मोलभाव करने की हालत में नहीं है। एनडीटीवी के मुताबिक रेड्डी और नायडू की पार्टियां भी गठबंधन को लेकर बहुत इच्छुक नहीं हैं। दोनों दलों को पता है कि भाजपा के साथ सीट शेयरिंग करना उनकी ताकत को नुकसान पहुंचाने वाला होगा। वहीं, टीडीपी प्रमुख को अल्पसंख्यकों के वोट खोने का डर भी सता रहा होगा। 

क्या होगी बैकरूम डील?
ऐसे में बैकरूम डील होने के ही चांसेज ज्यादा हैं। हालांकि प्रदेश में अपने प्रतिद्वंद्वी जगनमोहन रेड्डी की तुलना में चंद्रबाबू नायडू के जीतने के आसार बहुत ज्यादा नहीं हैं। भाजपा भी नायडू को बहुत ज्यादा भाव नहीं देने वाली है। इसकी वजह यह है कि पूर्व में दो बार वह एनडीए को छोड़कर जा चुके हैं। 2018 में तो भाजपा ने उनके लिए कहा था कि दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। चंद्रबाबू नायडू की मजबूरी यह है कि उनके खिलाफ कई कोर्ट केसेज हैं। ऐसे में वह चाहेंगे कि केंद्र में सत्ता में रहने वाली पार्टी उनके साथ रहे। इसलिए वह भाजपा का रुख किए हुए हैं। 

भाजपा कैंप में दो राय
इन हालात में जगनमोहन रेड्डी के भाजपा के साथ जुड़ने की संभावनाएं ज्यादा बन रही हैं। लेकिन वह भी केवल ‘एसोसिएट मेंबर’ का दर्जा ही चाहते हैं। अंदरूनी तौर पर जगन मोहन चाहते हैं कि किसी भी दल को केंद्र में स्पष्ट बहुमत न मिले। ताकि आंध्र प्रदेश केंद्र में बनने वाली सरकार के साथ अपनी शर्तों पर समझौता कर सके। दूसरी तरफ भाजपा कैंप में भी आंध्र प्रदेश में गठबंधन को लेकर एक राय नहीं है। एक गुट, जिसमें कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डग्गूबाती पुरंदेश्वरी भी हैं गठबंधन के पक्ष में हैं। वहीं, दूसरे गुट को लगता है कि अकेले चुनाव लड़ना प्रदेश में खुद को स्थापित करने में मददगार होगा।

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