DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Loksabha Elections 2019: पिता की बनाई पिच पर बीजेपी की ओर से खेलेंगे प्रवीण

                                    ani

वर्षों तक इलेक्ट्रो होम्योपैथी की प्रैक्टिस और इस विधा की मान्यता के लिए संघर्ष करते रहे डॉ. संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने अपने बेटे प्रवीण (Praveen Nishad) के लिए सियासत की ऐसी पिच तैयार की है जिस पर अब वे सन्तकबीरनगर में भाजपा की ओर से खेलेंगे। डा.संजय ने प्रवीण को सबसे पहले पिछले साल गोरखपुर उपचुनाव के मैदान में उतारकर संसद में पहुंचाया था
 तब वह सपा के साथ थे। एक साल बाद ही हालात ऐसे बदले कि पार्टी और मैदान दोनों बदल गए। 

कसरवल काण्ड से चर्चा में आये 

डा.संजय सबसे पहले चर्चा में सात जून 2015 को गोरखपुर के सहजनवा के कसरावल में हुई पुलिस फायरिंग की घटना से आये। इस घटना में अखिलेश निषाद नाम के एक युवक की मौत हो गई थी।
13 जनवरी 2013 को गठित निर्बल इंडियन शोषित हमारा दल (निषाद) के बैनर तले सैकडों युवकों के समूह ने कसरावल में रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था। मांग थी निषाद वंशीय 553 जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की। पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो बवाल हो गया। तोड़फोड़ शुरू हो गई। इसके बाद पुलिस ने फायरिंग की जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अखिलेश को गोली लगी। मौके पर ही अखिलेश की मौत हो गई।

ये भी पढ़ें: जहां से लगातार 5 बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ, उस गोरखपुर से BJP ने इन्हें दिया टिकट

अखिलेश सरकार ने सख्ती की, डा.संजय को करना पड़ा सरेंडर

कसरावल की घटना पर अखिलेश सरकार ने सख्ती दिखाते हुए डा.संजय निषाद और उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा करा दिया था। इस मामले में 35 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। डा.संजय निषाद भूमिगत हो गए थे। कुछ दिनों बाद जमानत पर रिहा हुए।

2017 उपचुनाव में पलटी बाजी, गोरखपुर में जीती योगी की सीट

कसरावल काण्ड के बाद डा.संजय निषाद ने अपनी जातीय ताकत को चुनावी राजनीति में आजमाना शुरू किया। 2017 में गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उन्हें बड़ा मौक़ा मिला। बसपा के समर्थन से उनके बेटे प्रवीण निषाद ने बतौर सपा उम्मीदवार योगी की छोड़ी सीट पर कब्जा जमा लिया। भाजपा के उम्मीदवार और वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल को भाजपा के लिए अजेय मानी जाने वाली इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद डा.संजय निषाद का कद उत्तर प्रदेश की सियासत में बढ़ने लगा। 

अखिलेश यादव के सामने रखी थी दो सीटों की डिमांड

डॉ.संजय निषाद ने 2019 के चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने दो सीटों की डिमांड रख दी थी। वह गोरखपुर के साथ-साथ महराजगंज की सीट भी निषाद पार्टी के लिए मांग रहे थे। लेकिन महराजगंज की सीट पर बात फंस गई। अंत में सपा पर गठबंधन धर्म का निर्वहन न करने का आरोप लगाते हुए डा.संजय ने गठबंधन तोड़ दिया। उसी शाम प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह उन्हें लेकर मुख्यमंत्री दफ्तर पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कराई। 

विस चुनाव में 60 सीटों पर लड़ी थी निषाद पार्टी

निषाद पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे। हालांकि जीत इनमें से सिर्फ एक विजय मिश्र को ज्ञानपुर सीट पर मिली। राज्यसभा चुनाव में विजय भी भाजपा के साथ खड़े नजर आये थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:bjp candidate list praveen nishad given seat from sant kabir nagar of uttar pradesh