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20 अप्रैल, 2021|8:35|IST

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिखेंगे आक्रामक तेवर, 294 नेताओं की उतारेगी फौज

bjp bengal poll machine to have 294 leaders from other states 45 member committee per constituency

भारतीय जनता पार्टी (BJP) 2021 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को जीतने में कोई कसर बाकी रखना नहीं चाहती है। पार्टी बड़े ही आक्रामक ढंग से इस चुनाव को लड़ने की योजना बना रही है। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। अमित शाह पश्चिम बंगाल के 294 विधानसभा सीटों में से 200 सीटों पर जीत दर्ज करने की मंशा के साथ काम कर रहे हैं। 

इस मामले की जानकारी रखने वाले बीजेपी के एक शीर्ष पदाधिकारी ने कहा कि दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों से बीजेपी के 294 नेता पश्चिम बंगाल पहुंचने वाले हैं और स्थानीय इकाई के साथ काम करेंगे। वे प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए बनाई की जाने वाली 45 सदस्यीय टीम का हिस्सा होंगे। मौजूदा जिला समितियां इन टीमों की सहायता करेंगी।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “दूसरे राज्यों के नेताओं का 26 नवंबर से आने का कार्यक्रम है। हमें बताया गया है कि केंद्रीय नेता और मंत्रियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और कर्नाटक सहित राज्यों के नेता और मंत्री बंगाल आएंगे।”

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भाजपा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश में जुटी है, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी वाम दलों के 34 साल के शासन को समाप्त कर 2011 में सत्ता में आई थी। 2016 में ममता को दोबारा जीत मिली थी। इधर खबर है कि अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा हर महीने बंगाल का दौरा करेंगे और प्रत्येक यात्रा के दौरानकम से कम दो दिन वह प्रवास करेंगे।

राज्य भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा “सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी कल्पना नहीं कर सकती है कि भाजपा कैसे इस चुनाव को लड़ने जा रही है। अमित शाह ने हाल ही में कोलकाता की अपनी यात्रा के दौरान हमें बताया कि पिछले साल जब हमने 42 लोकसभा सीटों में से 18 में जीत हासिल की थी, उस समय मशीनरी छेटी थी। इस चुनाव में बड़े पैमाने पर हम काम करेंगे।”

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को सत्ता में वापस लाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों का एक बड़ा वर्ग भी बंगाल आएगा। बीजेपी नेता ने कहा, 'आरएसएस के हमारे पदाधिकारी स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। ऐसे पदाधिकारियों का चयन किया जा रहा है। प्रत्येक 42 लोकसभा सीटों के लिए अलग-अलग टीमें होंगी।'

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एक अन्य स्थानीय नेता ने कहा, “हम सूक्ष्म स्तर पर टीमें बनाएंगे। पार्टी के अभियान और धन की निगरानी के लिए अलग-अलग समितियां होंगी जो कि मतदान केंद्र स्तर पर संगठनात्मक सेटअप की निगरानी करेंगे और इस सप्ताह शुरू होने वाले मतदाता सूची संशोधन पर नज़र रखेंगे। सोशल मीडिया अभियान पर जोर दिया जाएगा। यही कारण है कि राष्ट्रीय आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।'

दिलचस्प बात यह है कि निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात किए जाने वाले अधिकांश पदाधिकारी होटल या गेस्ट हाउस में जांच नहीं रुकेंगे। वे स्थानीय आरएसएस प्रचारकों या भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों पर रहेंगे।

भाजपा के राज्य नेताओं ने यह भी खुलासा किया कि पार्टी ने डेटा एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने के लिए तीन पेशेवर एजेंसियों को काम पर रखा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राज्य समिति में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जिसमें 12 उपाध्यक्ष और छह महासचिव शामिल हैं, इसके अलावा राज्य महासचिव (संगठन) अमिताव चक्रवर्ती, 10 सचिव और दो कोषाध्यक्ष हैं। राज्य समिति की सात सदस्य महिलाएं हैं।

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सुनील देवधर, दुष्यंत गौतम, विनोद तावड़े, हरीश द्विवेदी और विनोद सोनकर, शाह को सौंपी जाने वाली एक व्यापक रिपोर्ट के लिए जिला इकाइयों के अध्यक्षों और सचिवों से बात कर रहे हैं। राज्य के नेताओं को बुधवार से शुरू होने वाले साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं है। भाजपा के पांच नेताओं को अलग-अलग संगठनात्मक क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया है।

टीएमसी की नजर इन पांच नेताओं पर है। टीएमसी के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने बुधवार को कहा, 'हमें इन बाहरी लोगों पर नजर रखनी होगी और पता लगाना होगा कि वे यहां परेशानी खड़ा करने के लिए आए हैं या फिर खरीद-फरोख्त के लिए। हमारे कार्यकर्ताओं को अलर्ट पर रहने को कहा गया है।'

आपको बता दें कि बुधवार से, टीएमसी हर दोपहर राज्य मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है। पार्टी के सांसद और नेता विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाल रहे हैं और राज्य सरकार की उपलब्धियों और विभिन्न क्षेत्रों में भाजपा शासित राज्यों के प्रदर्शन की तुलना कर रहे हैं।शुक्रवार को, मंत्री ब्रात्य बसु ने आरोप लगाया कि बंगाल के भाजपा के मूल्यांकन से स्पष्ट है कि राज्य के किसी भी सांसद को कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया है।

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कोलकाता स्थित राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और वर्तमान मामलों के विश्लेषक उदयन बंदोपाध्याय ने कहा, “भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और उनके सहयोगियों को हराने के लिए एक समान मशीनरी स्थापित की थी। लेकिन बड़ा अंतर यह है कि भाजपा को यूपी पर राज करने का अनुभव था। इसने कभी भी बंगाल पर शासन नहीं किया है और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि यह 125 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में टीएमसी से आगे था। यह संभव हो गया, क्योंकि मतदाता जो किसी भी पार्टी के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं, उन्होंने भाजपा को वोट दिया। इन मतदाताओं में वोट बैंक का सबसे बड़ा हिस्सा शामिल है। हर पार्टी के पास प्रतिबद्ध मतदाताओं का बैंक है। भाजपा को गैर-प्रतिबद्ध मतदाताओं के सामने एक वैकल्पिक के तौर पर खुद पेश करनी होगी, 2021 में उनका विश्वास जीतने की योजना पर काम करना होगा।'

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