भाजपा ने भगवंत मान सरकार पर लगाया दमनकारी बर्ताव का आरोप
भाजपा ने भगवंत मान सरकार पर लगाया दमनकारी बर्ताव का आरोप-----------------------------पंजाब में नियमितीकरण व महंगाई भत्ते के मुद्दे पर किया जा रहा है दमन-राहुल गांधी पर लगाया दलित विरोधी होने का आरोप...

भाजपा ने भगवंत मान सरकार पर लगाया दमनकारी बर्ताव का आरोप---------------------------- -पंजाब में नियमितीकरण व महंगाई भत्ते के मुद्दे पर किया जा रहा है दमन
भाजपा का आरोप
-राहुल गांधी पर लगाया दलित विरोधी होने का आरोप
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नईदिल्ली। विशेष संवाददाता
भाजपा ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए उस पर सरकारी कर्मचारियों, किसानों और आम जनता पर दमनकारी बर्ताव का आरोप लगाया है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा है कि मान सरकार के वादाखिलाफी के कारण करीब 3 लाख कर्मचारी और साढ़े तीन लाख पेंशनभोगी अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि शिक्षकों, आंगनवाड़ी कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों और बेरोजगार युवाओं पर लाठीचार्ज कर भगवंत मान सरकार ने अपनी दमनकारी मानसिकता उजागर कर दी है।
कर्मचारियों की मांगें
भाटिया ने कहा है कि भाजपा इस दमनकारी बर्ताव के मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी कि कैसे पंजाब की भगवंत मान सरकार सरकारी कर्मचारियों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2022 में किए गए वादे पूरे नहीं किए और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार का दमन कर रही है। सरकारी कर्मचारियों, जिसमें अनुबंध कर्मचारी भी शामिल हैं, के लगभग 3 लाख कर्मचारी पंजाब के 23 जिलों में महा-हड़ताल कर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके साथ 3.5 लाख पेंशनभोगी भी समर्थन कर रहे हैं। कर्मचारियों की पहली मांग यह है कि नियमितीकरण का वादा किया गया था, लेकिन वह नियमितीकरण नहीं हुआ। दूसरी मांग महंगाई भत्ते को लेकर है, जो अभी भी लंबित है और दिया नहीं जा रहा है। तीसरी मांग पुरानी पेंशन योजना को लेकर है। अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने कहा था कि वे पुरानी पेंशन योजना लाएंगे, लेकिन आज स्थिति यह है कि पुरानी पेंशन योजना पर भी कोई रूपरेखा नहीं बनाई गई है।
राहुल गांधी पर आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने एक सवाल के जबाब में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी से बड़ा दलित-विरोधी नहीं है। प्रियंका गांधी वाड्रा के नामांकन के समय मल्लिकार्जुन खरगे को दूसरी पंक्ति में बैठाया गया था। खरगे ने अपमानित महसूस करने का मुद्दा उठाया था, चाहे असल बात कुछ भी रही हो फिर भी वे तीन हफ़्ते तक चुप रहे।
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