जैव विविधता संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका पर मंथन

हिन्दुस्तान, देहरादून
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देहरादून में भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण द्वारा ‘जैव विविधता और संग्रहालय’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. विजय शंकर सहाय ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में निबंध और चित्रांकन प्रतियोगिताओं के विजेता छात्रों को सम्मानित किया गया और विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण और संग्रहालयों की भूमिका पर विचार रखे।

जैव विविधता संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका पर मंथन
जैव विविधता संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका पर मंथन

देहरादून। भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र देहरादून में बुधवार को ‘जैव विविधता और संग्रहालय’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी शर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन और कार्यालय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कुमार कौशल के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण और संग्रहालयों की शैक्षिक एवं शोधपरक भूमिका पर विचार रखे।

मुख्य अतिथि के विचार

मुख्य अतिथि यूजीसी एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. विजय शंकर सहाय ने कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित किया। निदेशक प्रो. बीवी शर्मा ने ऑनलाइन माध्यम से अध्यक्षीय संबोधन दिया। कार्यक्रम के पहले सत्र में अगस्त में आयोजित आउटरीच कार्यक्रमों के तहत विभिन्न विद्यालयों में हुई निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रांकन प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों और अतिथियों ने संग्रहालय का भ्रमण किया। उन्होंने संरक्षित जैव विविधता एवं मानवविज्ञान से जुड़े दुर्लभ संग्रहों के साथ पारंपरिक घराट का भी अवलोकन किया। दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी लगाई। गैलरी में भोटिया और जौनसारी समुदायों के पारंपरिक आवासों के लघु प्रतिरूप भी प्रदर्शित किए गए।

संरक्षण और शोधपरक विचार

दूसरे सत्र में प्रो. विजय शंकर सहाय, प्रो. सुरेंद्र सिंह सुथार और प्रो. हर्षपति डोभाल ने जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण, मानवविज्ञान और संग्रहालयों की भूमिका पर शोधपरक विचार रखे। विशेषज्ञों ने संग्रहालयों को ज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। संगोष्ठी में संस्थान के सभी कर्मचारियों ने भाग लिया।

Chand Mohammad

लेखक के बारे में

Chand Mohammad

शॉर्ट बायो : चांद मोहम्मद पिछले 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान में देहरादून यूनिट में बतौर वरिष्ठ संवाददाता कार्य कर रहे है।


परिचय एवं अनुभव

चांद मोहम्मद हिंदी पत्रकारिता में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 11 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान अखबार में देहरादून में कार्यरत है और हेल्थ रिपोर्टिंग कर रहे है। वह पिछले आठ साल से हिंदुस्तान से जुड़े है। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ है।


करियर का सफर

चांद ने अपने करियर की शुरुआत 2015 में अमर अखबार देहरादून से की। जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2018 में उन्होंने हिंदुस्तान ज्वाइन किया। वर्तमान में वह हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी रिपोर्टिंग के अलावा देहरादून हिंदुस्तान में सह सिटी प्रभारी और सह अपराध संवाददाता की भूमिका में है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग

चांद बी कॉम और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर के छोटे से गांव भंगेला से है। समाज के वंचित लोगों की आवाज उठाने, मरीजों की पीड़ा बयां करना उनका एक जज्बा बयां करता है। कोविड के दौरान उन्होंने पीड़ा बताती और सिस्टम पर प्रहार करती रिपोर्टिंग की। मेडिकल रिसर्च और हेल्थ से जुड़े विषयों पर उन्होंने काफी काम किया है। लगातार जागरूकता परक और रिसर्च बेस्ड स्टोरी हेल्थ और मौसम पर करते है।


विजन

चांद का विजन है कि वह अपने जर्नलिज्म से आम आदमी के मुद्दों को उठाए और उन्हें हल कराए। पाठकों के बीच अखबार की विश्वसनीयता बनाए रखे।


विशेषज्ञता

स्वास्थ्य रिपोर्टिंग, सामाजिक मुद्दों, मौसम, मुस्लिम कम्युनिटी के मामलों के जानकार है।

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