विधेयक पास: आरक्षण में 200 प्वॉइंट रोस्टर प्रणाली को मंजूरी
केंद्रीय शैक्षणिक संस्था (शिक्षक के काडर में आरक्षण) विधेयक-2019 सोमवार को लोकसभा में पारित हो गया। इसमें केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में सीधी भर्ती में विभागवार आरक्षण की बजाय संस्थान को इकाई...

केंद्रीय शैक्षणिक संस्था (शिक्षक के काडर में आरक्षण) विधेयक-2019 सोमवार को लोकसभा में पारित हो गया। इसमें केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में सीधी भर्ती में विभागवार आरक्षण की बजाय संस्थान को इकाई मानने और 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली को लागू करने का प्रावधान है।
सरकार का तर्क है कि इस विधेयक में किए गए प्रावधानों से केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाओं व शिक्षकों के काडर में अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वर्गों व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को उचित आरक्षण मिल पाएगा।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि इस विधेयक से यह बात साबित हो गई कि सरकार को कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति की चिंता है। उन्होंने कहा कि अगर विभागवार आरक्षण की व्यवस्था लागू होती तो अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ों को सामाजिक न्याय नहीं मिल पाता।
पहले विश्वविद्यालय को इकाई मानकर ही शिक्षकों के पदों पर आरक्षण का प्रावधान था। मगर, बाद में एक याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभागों को इकाई मानकर आरक्षण निर्धारित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में भी इस फैसले पर राहत नहीं मिलने के बाद सरकार ने बीते मार्च में अध्यादेश के जरिए इस बदलाव को लागू कर दिया था। इसी अध्यादेश की जगह अब यह विधेयक लाया गया है।
रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि यूजीसी ने 21 विश्वविद्यालयों में व्यवस्था का अध्ययन कराया और यह जानने का प्रयास किया कि विश्वविद्यालय के स्थान पर विभाग को इकाई मानेंगे तो क्या अंतर होगा।
बिल स्थायी समिति को भेजने की मांग
इससे पहले कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि विधेयक को पारित किए जाने से पहले इस पर विस्तार से अध्ययन की जरूरत है। उन्होंने इस प्रावधान को लेकर पूर्व में चुनाव से ठीक पहले अध्यादेश लाए जाने का भी विरोध किया। अधीर ने कहा, बिना असामान्य परिस्थिति के अध्यादेश लाना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।


