कल्याण पदाधिकारियों ने बांधी काली पट्टी
सहरसा, नगर संवाददाता। बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ के आह्वान पर कार्यरत कल्याण पदाधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर कार्य किया। आठ सितंबर को मंत्री और सचिव से मिलने के बाद भी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया। विभागीय कार्रवाई के खिलाफ भी विरोध दर्ज किया गया।

सहरसा, नगर संवाददाता। बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार को राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत सहरसा जिले में कार्यरत कल्याण पदाधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर पदीय कार्यों का निष्पादन किया।
मांगों का ज्ञापन
बताया गया कि आठ सितंबर को बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय मंत्री लखेन्द्र पासवान एवं सचिव संदीप आर. पुडकलकट्टी से मिलकर सात सूत्री मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा था। मांगों पर विचार नहीं किए जाने के बाद शुक्रवार को पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर अपने दायित्वों का निर्वहन किया।
मांगों की सूची
मांगों में प्रखंड एवं अनुमंडल स्तर पर कल्याण शाखा को मूलभूत संसाधन उपलब्ध कराने तथा प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के बैठने के लिए कार्यालय कक्ष की व्यवस्था करने की मांग शामिल है। बताया गया कि लिपिक सह लेखापाल एवं डाटा ऑपरेटर के विभाग में प्रावधान रहने के बावजूद उनकी सेवा अब तक प्रखंड स्तर पर उपलब्ध नहीं कराई गई है।
विभागीय कार्रवाई का विरोध
इसके अलावा कार्यालय उपस्कर, स्टेशनरी सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बिना 388 पदाधिकारियों के विरुद्ध शुरू की गई विभागीय कार्यवाही समाप्त करने तथा क्षेत्रीय कार्यबल की विषमता दूर करने के लिए सचिवालय में कथित रूप से कार्यरत मॉनिटरिंग सेल को समाप्त करने की मांग की गई है।
संगठन का आरोप
कल्याण पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पूर्व सचिव दिवेश सेहरा द्वारा विद्वेष की भावना से सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बिना 450 पदाधिकारियों में से 388 के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई और अधिकांश मामलों में दंडित भी किया गया। विभागीय कार्यवाही समाप्त होने से पहले ही 20 से अधिक जिला कल्याण पदाधिकारियों को डिमोशन का दंड देते हुए प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने लोगों को अवैध रूप से प्रोन्नत कर लाभ पहुंचाया गया।


