अररिया: धरना-प्रदर्शन: समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग, अन्यथा आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ ने अररिया के जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया, जिसमें नियोजित और नियमित शिक्षकों ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की। शिक्षक धरना में शामिल होकर सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों की आलोचना की। मांगों में समय पर वेतन भुगतान, प्रोन्नति और अन्य सेवाओं का समुचित समाधान शामिल हैं।

अररिया से फुलेन्द्र मल्लिक की रिपोर्ट अररिया। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ जिला अररिया के आह्वान पर मंगलवार को जिला मुख्यालय में जिले भर के नियोजित, नियमित, विशिष्ट, विद्यालय अध्यापक, प्रधान शिक्षक, प्रधानाध्यापकों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं एवं मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व संघ के जिला अध्यक्ष मो जाफर रहमानी ने किया। संचालन प्रवक्ता राजेश कुमार सिंह कर रहे थे। धरना-प्रदर्शन में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने सरकार की शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी नीतियों, लंबित सेवा संबंधी मामलों तथा प्रशासनिक उदासीनता के विरुद्ध जोरदार आवाज उठाई। धरना के पश्चात शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री बिहार के नाम 28 सूत्री मांग-पत्र जिला प्रशासन के माध्यम से समर्पित किया।
धरना को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मो रहमानी ने कहा कि बिहार के शिक्षक वर्षों से अपने वैधानिक एवं न्यायोचित अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार द्वारा समय-समय पर अनेक घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन अधिकांश घोषणाएं धरातल पर लागू नहीं हो पाती हैं। परिणामस्वरूप शिक्षकों को आर्थिक, मानसिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के लाखों शिक्षक आज समय पर वेतन भुगतान, प्रोन्नति, स्थानांतरण, वेतन संरक्षण,वेतन विसंगति, सेवा निरंतरता, ईपीएफ, पुरानी पेंशन योजना, लंबित एरियर, अंतर वेतन, सेवा पुस्तिका संधारण, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य सेवा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। सभा को कोषाध्यक्ष सुनील कुमार यादव एवं अन्य ने भी संबोधित किया। संघ द्वारा प्रस्तुत मांग-पत्र में प्रमुख रूप से प्रत्येक माह समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने, सभी को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ देने, नियोजित शिक्षकों को नियमावली के अनुरूप प्रोन्नति प्रदान करने, अंतर-जिला एवं जिला अंतर्गत स्थानांतरण प्रक्रिया प्रारंभ करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, ईपीएफ खातों की विसंगतियों को दूर करने, लंबित एरियर एवं अंतर वेतन का भुगतान करने तथा प्रधान शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों की वेतन संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में आधारभूत संरचनाओं का विकास, छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना, कंप्यूटर शिक्षक एवं लिपिक की व्यवस्था, शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को राज्यकर्मी का दर्जा, अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी तथा शिक्षकों के सम्मान एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परिकल्पना भी अधूरी रह जाएगी। इसलिए सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए। धरना-प्रदर्शन में उपस्थित शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षकों के सम्मान की रक्षा करने और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए किया जा रहा है। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि शिक्षकों की सभी न्यायोचित एवं वैधानिक मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों के समाधान में और विलंब किया गया तो शिक्षक समुदाय चरणबद्ध एवं व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा विभाग की होगी। अंत में जिला अध्यक्ष मो जाफर रहमानी ने जिले के सभी शिक्षकों, संघ के पदाधिकारियों एवं आंदोलन में शामिल साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है और इसी एकजुटता के बल पर उनके अधिकारों की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया जाएगा। इस धरना प्रदर्शन में राजीव कुमार, प्रशांत सिंह, असलम परवेज, अरुण शुक्ला, मो यहया, रोहित केशव झा, मो जमाल उद्दीन, मो शाहजमां, अजीत कुमार सिंह, फिरोज आलम एवं हजारों शिक्षक एवं शिक्षिका उपस्थित हुए।
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