फरक्का (गंगा) जल संधि से बिहार की हकमारी
-बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए फरक्का जल संधि पर जिला जदयू की प्रेसवार्ता पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। फरक्का (गंगा) जल संधि बिहार की

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। फरक्का (गंगा) जल संधि बिहार की हकमारी है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। शुक्रवार को जदयू की ओर से प्रेसवार्ता में रुपौली के विधायक कलाधर मंडल,जनता दल यूनाइटेड के जिला अध्यक्ष प्रकाश सिंह एवं नगर अध्यक्ष अविनाश कुमार सिंह ने कहा कि फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
फरक्का जल संधि पर जन-जागरुकता के लिए आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी द्वारा चलाए जा रहे फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद कार्यक्रम और इसके उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा इस कार्यक्रम के तहत गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद कर रहे हैं, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। पार्टी के इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में होगा क्योंकि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। प्रेसवार्ता के दौरान नेताओं ने कहा कि जदयू का स्पष्ट स्टैंड है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के खासकर बिहार के हित में नहीं है। अभी हाल में संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने राज्यसभा में बड़ी मुखरता से इस विषय को उठाया और कहा कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं।


